Teacher's Day 2026: क्यों खास है 5 सितंबर? और क्या है इस दिन का महत्व?

राष्ट्रपति बनने के बाद सामने आया शिक्षक दिवस मनाने का विचार

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चंडीगढ़ (सच कहूँ/एम के शायना)। कहा जाता है कि एक अच्छा शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि अपने विद्यार्थियों को जीवन की राह पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी देता है। बच्चे के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य को आकार देने में माता-पिता के साथ शिक्षक की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। यही वजह है कि गुरु को भारतीय परंपरा में विशेष सम्मान दिया गया है। 

हर वर्ष 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस (Teachers' Day) मनाया जाता है। यह दिन देशभर के शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों तक इस दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भाषण, निबंध, कविता, प्रश्नोत्तरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शुभकामना संदेश जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।

5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस?

भारत में 5 सितंबर का दिन शिक्षक दिवस के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन देश के महान शिक्षाविद, दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तनी में हुआ था। वे शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में अपनी गहरी विद्वता के लिए प्रसिद्ध रहे। आगे चलकर उन्होंने देश के पहले उपराष्ट्रपति और बाद में भारत के दूसरे राष्ट्रपति का पद संभाला। उनका मानना था कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के विचारों और चरित्र को विकसित करने का महत्वपूर्ण साधन है। 

राष्ट्रपति बनने के बाद सामने आया शिक्षक दिवस मनाने का विचार

शिक्षक दिवस से जुड़ी सबसे चर्चित बात डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन से संबंधित है। जब वे भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ विद्यार्थियों और मित्रों ने उनसे जन्मदिन मनाने की अनुमति मांगी। बताया जाता है कि डॉ. राधाकृष्णन ने अपने जन्मदिन को व्यक्तिगत उत्सव के बजाय शिक्षकों के सम्मान से जोड़ने की इच्छा जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। इसके बाद देश में उनके जन्मदिन को शिक्षकों के सम्मान के दिन के रूप में मनाने की परंपरा स्थापित हुई। वर्ष 1962 से भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है।

कौन थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन?

डॉ. राधाकृष्णन भारत के उन विद्वानों में शामिल थे जिन्होंने भारतीय दर्शन और शिक्षा के विचारों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। बचपन से ही उनका अध्ययन के प्रति विशेष लगाव था। वे पुस्तकों के गहन अध्येता थे और स्वामी विवेकानंद के विचारों से भी प्रभावित रहे। उन्होंने शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में लंबे समय तक कार्य किया तथा देश की कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं से जुड़े रहे। उनकी विद्वता के कारण उन्हें देश और विदेश में सम्मान मिला। भारतीय सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। डॉ. राधाकृष्णन का निधन 17 अप्रैल 1975 को चेन्नई में हुआ। 

शिक्षक समाज के लिए क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?

शिक्षक किसी विद्यार्थी को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं रहते। वे बच्चों में अनुशासन, जिम्मेदारी, आत्मविश्वास, तर्कशीलता और बेहतर नागरिक बनने की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक शिक्षक विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा दे सकता है। कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस देना और असफलता से सीखने की प्रेरणा देना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसीलिए कहा जाता है कि किसी व्यक्ति की सफलता में उसके शिक्षकों के मार्गदर्शन की छाप लंबे समय तक बनी रहती है।

स्कूलों में कैसे मनाया जाता है शिक्षक दिवस?

शिक्षक दिवस के अवसर पर देशभर के शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्कूलों में विद्यार्थी अपने शिक्षकों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। 

इस अवसर पर—

  • शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं।
  • विद्यार्थी भाषण और निबंध प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।
  • कविता और शायरी के माध्यम से गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।
  • प्रश्नोत्तरी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
  • विद्यार्थी शिक्षकों को शुभकामना संदेश और कार्ड देते हैं।
  • शिक्षकों के योगदान पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
  • शिक्षक दिवस का असली संदेश क्या है?
  • शिक्षक दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है जो विद्यार्थियों के भविष्य को
  • बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास करते हैं।
  • एक शिक्षक की सीख कई बार विद्यार्थी के जीवन में वर्षों बाद भी दिखाई देती है। इसलिए 5 सितंबर हमें यह याद दिलाता है कि ज्ञान देने वाले गुरु का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि हमेशा किया जाना चाहिए।

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