प्रेरणादायक मिसाल हैं लोहगढ़ के सरकारी प्राथमिक स्कूल के शिक्षक धर्मेंद्र कुमार
दो बच्चों की बचाई जान, हरियाणा-पंजाब और राजस्थान में देते हैं फ्री रेस्क्यू सेवा
डबवाली, (सच कहूँ/सुभाष)। शिक्षक का काम केवल किताबों का ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि अपने कर्मों से समाज को इंसानियत का पाठ पढ़ाना भी है। शिक्षक दिवस के मौके पर गांव लोहगढ़ निवासी सरकारी प्राथमिक शिक्षक धर्मेंद्र कुमार ऐसी ही प्रेरणादायक मिसाल हैं। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाले धर्मेंद्र कुमार को जैसे ही किसी के पानी में डूबने की सूचना मिलती है, वह शिक्षक की भूमिका से निकलकर गोताखोर बन जाते हैं। पिछले करीब 18 वर्षों से धर्मेंद्र कुमार नहरों, जोहड़ों, डिग्गियों और अन्य जल स्रोतों में नि:शुल्क रेस्क्यू सेवा दे रहे हैं। इस दौरान वह पानी में डूबने से जान गंवा चुके करीब 200 लोगों के पार्थिव शरीरों को बाहर निकालने में मदद कर चुके हैं और दो बच्चों को जिंदा बाहर निकालकर उनकी जान बचा चुके हैं। Dabwali News
भाई की मौत ने बदल दी जिंदगी
46 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार के पिता हरचंद और माता शरबती मजदूरी करते थे। उन्होंने डिप्लोमा इन एजुकेशन करने के बाद वर्ष 2004 में गांव लोहगढ़ में जेबीटी शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की। वर्ष 2013 से वह गांव सकताखेड़ा के सरकारी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि करीब 17 साल पहले उनके भाई की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। इस हादसे ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्हें लगा कि समय पर प्रशिक्षित गोताखोर और रेस्क्यू सुविधा मिल जाए तो शायद कई परिवार अपने प्रियजनों को बचा सकते हैं। इसी सोच ने उन्हें गोताखोरी और रेस्क्यू सेवा से जोड़ दिया।
नहर, जोहड़ और डिग्गियों में करते हैं रेस्क्यू
धर्मेंद्र कुमार अब तक नहरों, जोहड़ों, खेतों की डिग्गियों और वाटर वर्क्स की टंकियों सहित विभिन्न स्थानों पर रेस्क्यू कर चुके हैं। वह पानी में डूबने से जान गंवा चुके करीब 200 लोगों को बाहर निकालने के रेस्क्यू अभियान में सहायता कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कई जीव-जंतुओं को भी पानी से जीवित बाहर निकाला है। सबसे बड़ी बात यह है कि वह दो बच्चों को समय रहते पानी से बाहर निकालकर उनकी जान बचाने में भी सफल रहे। पानी में डूबे एक कंबाइन, दो ट्रक, एक कैंटर, एक ट्रैक्टर, करीब 20 मोटरसाइकिल और स्कूटी के साथ चार-पांच साइकिलों को बाहर निकालने में भी उन्होंने मदद की है।
दुखी परिवार से पैसा लेना नहीं मंजूर
धर्मेंद्र कुमार कहते हैं कि किसी हादसे में परिवार का सदस्य खोने के बाद लोग पहले ही गहरे सदमे में होते हैं। ऐसे समय में पानी में डूबे अपने प्रियजन को बाहर निकालने के बदले पैसे लेना उन्हें मंजूर नहीं है। इसी वजह से वह अपनी रेस्क्यू सेवा के लिए किसी परिवार से कोई शुल्क नहीं लेते। सूचना मिलते ही वह अपने स्तर पर मौके पर पहुंचते हैं और आने-जाने का खर्च भी खुद उठाते हैं।
अपनी जेब से खरीदा डेढ़ लाख का रेस्क्यू सामान
रेस्क्यू कार्य को बेहतर तरीके से करने के लिए धर्मेंद्र कुमार ने अपनी जेब से करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत से ऑक्सीजन किट और अन्य जरूरी गोताखोरी उपकरण खरीदे हैं। उनका कहना है कि जरूरत के समय सही उपकरण होना बेहद जरूरी है।
हरियाणा-पंजाब से राजस्थान तक पहुंची सेवा
धर्मेंद्र कुमार की रेस्क्यू सेवा का दायरा केवल डबवाली तक सीमित नहीं है। डबवाली, चौटाला, सरसा और ओढ़ा सहित राजस्थान के कई क्षेत्रों में उनके संपर्क नंबर उपलब्ध हैं। सूचना मिलने पर वह अक्सर मोटरसाइकिल से मौके पर पहुंच जाते हैं। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के विभिन्न इलाकों में वह नि:शुल्क रेस्क्यू सेवा दे चुके हैं।
जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई का भी उठाते हैं जिम्मा
स्कूल में पढ़ाने के अलावा धर्मेंद्र कुमार सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में भी मदद करते हैं। उनका प्रयास रहता है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई बीच में न छूटे।