ईडी सिर्फ बदनाम करने की कोशिश कर रही: अमन अरोड़ा

कहा, मैं तो सिर्फ चार माह ही रहा हूँ कैबिनेट मंत्री, अन्य मंत्रियों को क्यों नहीं किया तलब

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चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Chandigarh News: आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि केन्द्रीय जाँच एजेंसी ठोस सबूत पेश करने की बजाय चिट्ठियों, मीडिया लीक और अस्पष्ट आरोपों के जरिए ‘आप’ की राजनीतिक लीडरशिप को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि ईडी का उद्देश्य पंजाब में अराजकता पैदा करना और राज्य सरकार को प्रभावी ढंग से काम करने से रोकना है।

मीडिया से बातचीत करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब पुलिस ने ईडी से मामले से संबंधित पूरे दस्तावेज, छापों के दौरान जब्त किए गए सबूत और इलेक्ट्रॉनिक डाटा मांगा है, लेकिन जाँच एजेंसी की ओर से अब तक स्पष्ट और जाँच में उपयोग किए जा सकने वाले सबूत उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने 28 अगस्त को ईडी को पत्र लिखकर आरोपों के समर्थन में पूरा दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड देने के लिए कहा था। इसके बाद ईडी को 1 सितंबर को संबंधित सामग्री सहित एक अधिकारी भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन कोई अधिकारी पेश नहीं हुआ। अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के डीजीपी को ईडी की ओर से बार-बार चिट्ठियाँ भेजी जा रही हैं, जिनमें धारा 66(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने की माँग वाली ताजा चिट्ठी भी शामिल है।

उन्होंने इसे केन्द्र की भाजपा सरकार की ‘बौखलाहट और निराशा’ करार दिया। केन्द्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ‘आप’ पंजाब अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने सीबीआई को केन्द्र सरकार का ‘तोता’ कहा था। अमन अरोड़ा ने कहा कि चाहे ईडी हो, सीबीआई हो या अन्य केन्द्रीय एजेंसियाँ, ये सभी तोतों की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी गड़बड़ी को साबित किए ईडी की ओर से संजीव अरोड़ा, लाल चंद कटारूचक्क और उनके सहित आप नेताओं के नाम मीडिया में उछाले जा रहे हैं।

एल्टस प्रॉजैक्ट से संबंधित मामले के तथ्य पेश करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि ्रप्रॉजैक्ट से संबंधित चेंज आॅफ लैंड यूज (सीएलयू) की छह मंजूरियाँ दी गई थीं, लेकिन ‘आप’ सरकार के कार्यकाल के दौरान एक भी सीएलयू मंजूर नहीं की गई। उन्होंने कहा कि 17 नवंबर 2000, 14 मई 2012, 25 जून 2013, 17 फरवरी 2018, 7 मार्च 2018 और 7 मार्च 2022 की मंजूरियाँ पूर्व कांग्रेस या अकाली-भाजपा सरकारों के समय दी गई थीं। उन्होंने कहा कि 2011 से 2025 के बीच प्रॉजैक्ट के लेआउट प्लान में कई बार बदलाव किए गए और इनमें से ज्यादातर बदलाव पूर्व सरकारों के कार्यकाल के दौरान हुए।

डेवलपर्स के लिए 25 फीसदी जमीन की मालिकी से संबंधित नीति पर भी सवाल उठाते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि यह नीति 2012 की अकाली-भाजपा सरकार के समय शुरू की गई थी, जबकि 2025 में ‘आप’ सरकार ने इसमें बदलाव कर लाइसेंस और सीएलयू लेने के लिए डेवलपर्स के पास 100 फीसदी जमीन की मालिकी होना अनिवार्य कर दिया। उन्होंने दावा किया कि इससे पुरानी नीति की खामियों को दूर किया गया है।

Aman-Arora

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