Saudi Arabia Death Penalty: ऊदी अरब में फांसी के बाद विदेशियों के शव क्यों नहीं मिलते? जानिए पूरा मामला
ऊदी अरब में फांसी के बाद विदेशियों के शव क्यों नहीं मिलते? जानिए पूरा मामला
नई दिल्ली। Saudi Arabia Death Penalty: सऊदी अरब दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में मौत की सजा दी जाती है। खास तौर पर विदेशी नागरिकों को दी जाने वाली फांसी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं।
इनमें एक अहम मुद्दा यह भी है कि फांसी के बाद मृतकों के शव परिवारों को कब और किस प्रक्रिया के तहत सौंपे जाते हैं। कई मामलों में परिवारों को शव नहीं मिलने या दफन की जगह की जानकारी नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि, सऊदी सरकार की ओर से शव वापस नहीं करने की कोई स्पष्ट और सार्वजनिक सामान्य नीति सामने नहीं आई है, इसलिए इस विषय में अलग-अलग मामलों की परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
फांसी की संख्या में हुई बड़ी बढ़ोतरी
सऊदी अरब में हाल के वर्षों में मौत की सजा के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 2024 में 345 लोगों को फांसी दी गई, जिनमें करीब 40 प्रतिशत यानी 137 लोग विदेशी नागरिक थे। इनमें कई लोग ड्रग्स से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए थे।
2024 में कुल 122 लोगों को ड्रग्स से जुड़े अपराधों में फांसी दी गई। इनमें विदेशी नागरिकों की संख्या काफी अधिक थी। पाकिस्तान, मिस्र, इथियोपिया, नाइजीरिया, यमन और अन्य देशों के नागरिक भी इन मामलों में शामिल रहे।
विदेशी नागरिकों को लेकर क्यों उठते हैं सवाल?
विदेशी नागरिकों के मामलों में परिवारों के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है, क्योंकि वे दूसरे देश में बंद होते हैं और उन्हें स्थानीय कानूनी व्यवस्था, भाषा तथा कांसुलर सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कुछ मामलों में विदेशी कैदियों के लिए वकील तक पर्याप्त पहुंच, कांसुलर सहायता और प्रभावी दुभाषिए की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई है। संगठन ने यह भी कहा है कि कुछ मामलों में कैदियों ने हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार या दबाव में कबूलनामे लिए जाने के आरोप लगाए हैं। ये मानवाधिकार संगठनों के आरोप और आकलन हैं, जिन्हें सऊदी अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से अलग समझना चाहिए।
क्या शव परिवार को नहीं लौटाने का कोई आधिकारिक नियम है?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सऊदी अरब की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट सार्वजनिक नीति व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है, जिसमें कहा गया हो कि फांसी दिए गए विदेशी नागरिकों के शव हमेशा परिवारों को नहीं लौटाए जाएंगे।
इसी वजह से यह कहना भी सही नहीं होगा कि हर विदेशी नागरिक की फांसी के बाद शव परिवार को नहीं दिया जाता। अलग-अलग मामलों में प्रक्रिया और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने कुछ मामलों में पारदर्शिता की कमी और परिवारों को पर्याप्त जानकारी नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। वहीं सऊदी अधिकारियों ने अपने न्यायिक और कानूनी तंत्र का बचाव करते हुए कहा है कि मौत की सजा के मामलों में न्यायिक समीक्षा की प्रक्रिया मौजूद है।
2026 में भी जारी है फांसी का सिलसिला
एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 1 जनवरी से 22 जून 2026 तक सऊदी अरब में 96 लोगों को फांसी दी जा चुकी थी, जिनमें 61 मामले ड्रग्स से जुड़े थे। इनमें ड्रग्स संबंधी मामलों में फांसी पाने वाले 39 लोग विदेशी नागरिक थे।
यह आंकड़े बताते हैं कि मौत की सजा का इस्तेमाल 2026 में भी जारी है। ऐसे में विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में कांसुलर सहायता, न्यायिक प्रक्रिया और परिवारों को सूचना दिए जाने जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बने हुए हैं।
मानवाधिकार संगठनों की क्या मांग है?
मानवाधिकार संगठन मौत की सजा को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने, निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने और विदेशी कैदियों को पर्याप्त कानूनी व कांसुलर सहायता देने की मांग करते रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सऊदी अरब में मौत की सजा पर रोक लगाने और अंततः इसे समाप्त करने की अपील की है।
कुल मिलाकर, सऊदी अरब में फांसी के बाद विदेशी नागरिकों के शवों से जुड़ा मुद्दा कानूनी प्रक्रिया, सरकारी पारदर्शिता, परिवारों को सूचना और मानवाधिकारों से जुड़े कई सवालों को सामने लाता है। हालांकि शवों को हर मामले में परिवार को नहीं सौंपे जाने की कोई स्पष्ट सार्वजनिक सामान्य नीति सामने नहीं है, लेकिन कुछ मामलों को लेकर मानवाधिकार संगठनों और प्रभावित परिवारों की शिकायतों ने इस विषय को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का मुद्दा बनाया है।