यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्कर को ग्लोबल साउथ तक ले जाने की तैयारी

फिनटेक निर्यात बढ़ाने पर भारत का जोरः वाणिज्य सचिव

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मुंबई,(एजेंसी)। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि भारत को अपनी फिनटेक क्षमताओं, विशेष रूप से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के अनुभव का उपयोग करते हुए वैश्विक बाजारों में विस्तार करना चाहिए। मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में बोलते हुए अग्रवाल ने कहा कि भारत के पास विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों में अपनी डिजिटल भुगतान और वित्तीय प्रौद्योगिकी सेवाओं का विस्तार करने का बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर फिनटेक सेवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और यदि भारत इस व्यापार में केवल 10 प्रतिशत हिस्सेदारी भी हासिल कर लेता है, तो देश का फिनटेक सेवा निर्यात मौजूदा 8 अरब डॉलर से बढ़कर 60 से 80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। राजेश अग्रवाल ने कहा, "फिनटेक सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। यदि हम इसमें 10 प्रतिशत योगदान भी हासिल करते हैं, तो यह 8 अरब डॉलर से 60-80 अरब डॉलर के निर्यात तक पहुंचने की यात्रा हो सकती है।

"उन्होंने बताया कि भारत पहले से ही अपने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल को अन्य देशों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है। इस उद्देश्य से भारत ने अब तक लगभग 23 देशों के साथ डीपीआई सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा, सरकार कई देशों के साथ भुगतान प्रणालियों को परस्पर जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है, विशेष रूप से उन देशों में जहां भारतीय प्रवासियों की बड़ी आबादी रहती है।

अग्रवाल ने कहा, "हमने डीपीआई सहयोग के लिए लगभग 23 देशों के साथ समझौते किए हैं। हम जिन भी मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत करते हैं, उनमें भुगतान प्रणालियों के समन्वय पर भी चर्चा करते हैं, खासकर उन देशों के साथ जहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या मौजूद है।" उन्होंने आगे कहा कि प्रौद्योगिकी वित्तीय सेवाओं की लागत कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेष रूप से प्रेषण (रेमिटेंस), ऋण वितरण और भुगतान सेवाओं को अधिक सस्ता एवं सुलभबनाने के लिए डिजिटल भुगतान प्रणालियों और भारत की फिनटेक क्षमताओं का वैश्विक स्तर पर विस्तार किया जा सकता है।

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