5 वर्षीय बेटे के जन्मदिन पर आने का किया था वादा, अब तिरंगे में लिपटकर लौटेंगे शहीद सुखचैन
राजौरी में देश की रक्षा करते हुए दी शहादत, एंबुलेंस से देर रात गांव पहुंचेगा पार्थिव शरीर
सरसा, (सच कहूँ न्यूज)। 10 दिन बाद छुट्टी लेकर घर आऊंगा और तुम्हारे जन्मदिन में शामिल होऊंगा...। पांच वर्षीय आकाशदीप से किया पिता सुखचैन सिंह का यह वादा अब कभी पूरा नहीं होगा। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए गांव कुताबढ़ (प्यार नगर) निवासी करीब 30 वर्षीय सुखचैन सिंह अब अपने बेटे के जन्मदिन पर घर लौटेंगे जरूर, लेकिन तिरंगे में लिपटकर। उनकी शहादत की खबर से गांव में मातम पसरा है।
शुक्रवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचना था, लेकिन पठानकोट में मौसम खराब होने के कारण विमान को वहीं उतारना पड़ा। इसके बाद पार्थिव शरीर को एंबुलेंस से सड़क मार्ग के जरिए पैतृक गांव लाया जा रहा है। देर रात तक पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की उम्मीद है। शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। शुक्रवार को दिनभर रिश्तेदारों और ग्रामीणों का गांव में पहुंचना जारी रहा। हर किसी की नजर उस रास्ते पर थी, जहां से उनका पार्थिव शरीर आने वाला था। घर में मां अमर कौर, पत्नी निर्मल कौर और परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। पांच वर्षीय आकाशदीप मां की गोद में गुमसुम बैठा रहा। उसे शायद अब भी उम्मीद है कि कुछ दिन बाद पिता घर लौटेंगे।
आखिरी बातचीत में कहा था मैं बिल्कुल ठीक हूं
शहीद के छोटे भाई सरबजीत सिंह ने बताया कि करीब दो महीने पहले सुखचैन छुट्टी पर घर आए थे। वीरवार सुबह करीब 8 बजे फोन पर भाई से बात हुई थी। बातचीत के दौरान सुखचैन ने कहा था कि वह बिल्कुल ठीक हैं और करीब 10 दिन बाद छुट्टी लेकर घर आएंगे। इसी दौरान उन्होंने बेटे आकाशदीप के जन्मदिन में शामिल होने की बात भी कही थी। परिवार को उनकी शहादत की सूचना शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे मिली। उस समय परिवार के लोग एक रिश्तेदार के निधन पर गए हुए थे। इसी दौरान राजौरी से एक अधिकारी का फोन आया और सुखचैन के शहीद होने की जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
2015 में सेना में हुए थे भर्ती
परिजनों के अनुसार सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह 59 इंजीनियरिंग रेजिमेंट, राजौरी में तैनात थे। करीब छह वर्ष पहले उनका विवाह निर्मल कौर से हुआ था। परिवार में पत्नी और पांच वर्षीय बेटा आकाशदीप है। पिता बलविंदर सिंह का पहले ही निधन हो चुका है। मां अमर कौर हैं। सुखचैन तीन भाइयों और एक बहन सहित परिवार के सदस्य थे। उनके भाई गांव में शैटरिंग का काम करते हैं। गांव के सरपंच बेअंत सिंह ने कहा कि सुखचैन की शहादत पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है। दुख की इस घड़ी में पूरा गांव परिवार के साथ खड़ा है।