Rudraksha Farming: उत्तराखंड बनेगा रुद्राक्ष हब, सरकार के रोडमैप तैयार करने के निर्देश

व्यावसायिक खेती को बढ़ावा, सरकार बनाएगी नई नीति

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Rudraksha Farming: नई टिहरी, (सच कहूँ/हि.स.)। उत्तराखंड को रुद्राक्ष की खेती, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में रुद्राक्ष की संगठित और व्यावसायिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह पहल नेपाल में रुद्राक्ष उत्पादन से जुड़ी व्यवस्थाओं के अध्ययन के बाद सामने आई है। टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर रुद्राक्ष की खेती और उससे जुड़े कारोबार का विस्तृत अध्ययन किया था।

नेपाल में उत्पादन मॉडल का अध्ययन

प्रतिनिधिमंडल में कृषि वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक लेखक डॉ. रमेश सिंह पाल तथा रुद्राक्ष विशेषज्ञ प्रिंस अग्रवाल भी शामिल थे। टीम ने नेपाल में रुद्राक्ष की खेती, फसल प्रबंधन, कटाई के बाद प्रसंस्करण, विपणन व्यवस्था और किसान आधारित उत्पादन मॉडल की जानकारी जुटाई। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी, जलवायु और रुद्राक्ष उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का भी वैज्ञानिक आकलन किया। अध्ययन के दौरान यह समझने का प्रयास किया गया कि किसानों को संगठित तरीके से जोड़कर रुद्राक्ष को आय का स्थायी साधन कैसे बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री को सौंपी गई अध्ययन रिपोर्ट

प्रतिनिधिमंडल ने अपने क्षेत्रीय अध्ययन और वैज्ञानिक निष्कर्षों पर आधारित रिपोर्ट 9 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में उत्तराखंड में रुद्राक्ष की खेती की संभावनाओं और इसके लिए आवश्यक नीतिगत उपायों का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट पर विचार करने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर 31 अगस्त को उप सचिव की ओर से उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग को पत्र जारी किया गया। इसमें राज्य में रुद्राक्ष की संगठित खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीति तैयार करने को कहा गया है।

टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय के अनुसार, प्रस्तावित नीति का उद्देश्य रुद्राक्ष को उत्तराखंड में व्यावसायिक रूप से लाभकारी फसल के रूप में विकसित करना है। इसके लिए खेती से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और मूल्य संवर्धन तक पूरी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को बेहतर पौध सामग्री, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो रुद्राक्ष की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश

भारत में रुद्राक्ष की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात पर काफी निर्भरता बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का 95 प्रतिशत से अधिक रुद्राक्ष नेपाल और इंडोनेशिया से आयात करता है। ऐसे में उत्तराखंड में रुद्राक्ष उत्पादन को बढ़ावा मिलने से घरेलू मांग की पूर्ति में मदद मिल सकती है। साथ ही किसानों को नई फसल और उससे जुड़े प्रसंस्करण उद्योग के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर भी मिल सकते हैं।

विधायक किशोर उपाध्याय, डॉ. रमेश सिंह पाल और रुद्राक्ष विशेषज्ञ प्रिंस अग्रवाल ने राज्य सरकार की इस नीति पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि वैज्ञानिक खेती और बेहतर विपणन व्यवस्था के माध्यम से उत्तराखंड रुद्राक्ष के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

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