Iran-US Tension: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच खाड़ी में बड़ा घटनाक्रम, अमेरिकी जहाज की तेल टैंकर से टक्कर के बाद खार्ग आइलैंड के पास धमाकों की आवाज
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अमेरिकी जहाज की टैंकर से टक्कर, खार्ग आइलैंड के पास धमाकों से बढ़ी चिंता
वाशिंगटन। Iran-US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र से एक और बड़ी खबर सामने आई है। रॉयटर्स ने ईरान के सरकारी मीडिया आउटलेट नूरन्यूज के हवाले से बताया है कि शनिवार को एक अमेरिकी जहाज की एक तेल टैंकर से टक्कर हुई। इस घटना के बाद ईरान के प्रमुख तेल केंद्र खार्ग आइलैंड के आसपास धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम ने पहले से तनावपूर्ण खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच किसी जहाज से जुड़ी घटना को गंभीरता से देखा जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का सबसे बड़ा केंद्र
ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से जारी टकराव हाल के दिनों में और ज्यादा गंभीर हुआ है। इसका सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास दिखाई दे रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद इसी समुद्री रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचते हैं। ऐसे में अगर यहां लंबे समय तक सैन्य तनाव बना रहता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
30 अगस्त को लारक आइलैंड पर अमेरिकी हमला
तनाव के बीच अमेरिका ने 30 अगस्त को ईरान के लारक आइलैंड पर हमले किए थे। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस कार्रवाई में ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिका का दावा था कि इन ठिकानों से समुद्र में माइंस बिछाने और जहाजों की आवाजाही के लिए खतरा पैदा करने की क्षमता जुड़ी हुई थी।
इसके बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई। ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया।
1 सितंबर को फिर बढ़ी सैन्य कार्रवाई
इसके कुछ ही दिन बाद 1 सितंबर को अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में दोबारा हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस कार्रवाई में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन, समुद्री संसाधन, माइन बिछाने की क्षमता और संचार केंद्रों को निशाना बनाया गया। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। बहरीन, जॉर्डन और इराक समेत कई इलाकों में सैन्य तनाव का असर दिखाई दिया।
अब समुद्री जहाज भी निशाने पर?
अब इस संघर्ष का असर समुद्री यातायात पर भी दिखाई देने लगा है। रॉयटर्स की रिपोर्टों के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जहाजों पर गोलीबारी और अन्य हमलों की घटनाओं ने समुद्री कारोबार को लेकर चिंता बढ़ाई है। शनिवार को अमेरिकी जहाज और तेल टैंकर के बीच हुई टक्कर की खबर ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि इस घटना से जुड़े सभी विवरण अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन खार्ग आइलैंड के आसपास धमाकों की आवाज की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
खार्ग आइलैंड क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
खार्ग आइलैंड ईरान के लिए बेहद रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखता है। यह देश के प्रमुख तेल निर्यात केंद्रों में शामिल है। इसलिए इसके आसपास किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या विस्फोट की खबर को केवल स्थानीय घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता। अगर खार्ग जैसे महत्वपूर्ण तेल केंद्र के आसपास तनाव बढ़ता है, तो इसका असर ईरान की तेल निर्यात क्षमता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों की धारणा पर भी पड़ सकता है।
दुनिया की तेल सप्लाई पर कितना बड़ा असर?
होर्मुज स्ट्रेट से सामान्य परिस्थितियों में भारी मात्रा में कच्चा तेल और ऊर्जा उत्पाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचते हैं। यही वजह है कि इस समुद्री मार्ग में लंबे समय तक किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव और बढ़ता है और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, शिपिंग लागत में बढ़ोतरी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान-अमेरिका का संघर्ष सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या इसका असर खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर लंबे समय तक देखने को मिलता है। आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और खार्ग आइलैंड के आसपास की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।