Israel News: इजरायल की राजनीति में बड़ा उलटफेर! नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट, गादी आइसेनकोट को सरकार बनाने का पहला मौका

इजरायल की राजनीति में बड़ा उलटफेर! नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट, गादी आइसेनकोट को सरकार बनाने का पहला मौका

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इजरायल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने शनिवार (7 नवंबर 2026) को विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट को गठबंधन सरकार बनाने का पहला मौका देने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर संकट और गहरा गया है। आइसेनकोट अब इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गए हैं।

राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने आइसेनकोट को सौंपी जिम्मेदारी

राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने चुनावी नतीजों और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ हुई बातचीत के बाद यह फैसला लिया। उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार गादी आइसेनकोट को नई गठबंधन सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है।राष्ट्रपति की घोषणा के तुरंत बाद आइसेनकोट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि अब एक राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय है। उन्होंने कहा कि देश उनके प्रयासों का हकदार है और इसे साबित करने के लिए वह हर संभव कोशिश करेंगे।

आइसेनकोट के पास गठबंधन सरकार बनाने के लिए छह सप्ताह का समय होगा। हालांकि, इजरायल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह उनके लिए आसान चुनौती नहीं होगी।

नेतन्याहू और उनके सहयोगियों ने खोया बहुमत

पिछले महीने हुए चुनावों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके सहयोगियों को संसद में बहुमत नहीं मिल सका। दूसरी तरफ, गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को भी सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या हासिल नहीं हुई।

ऐसे में इजरायल की संसद में बहुमत जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। किसी भी गठबंधन सरकार को बनाने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच समझौते करने होंगे। इन समझौतों के चलते नेताओं को अपने समर्थकों की नाराजगी का सामना भी करना पड़ सकता है।

अरब पार्टियां बन सकती हैं किंगमेकर

इस राजनीतिक घटनाक्रम में अरब पार्टियों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। चुनावों में ऐतिहासिक बढ़त हासिल करने के बाद इन पार्टियों के पास अब नई सरकार के गठन में निर्णायक भूमिका निभाने का मौका है।
हालांकि, अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाना आइसेनकोट के लिए राजनीतिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इजरायल के इतिहास में अब तक केवल एक बार कोई अरब पार्टी गठबंधन सरकार का हिस्सा बनी है।

गाजा में तीन साल से अधिक समय तक चले युद्ध और इजरायल की आंतरिक राजनीतिक परिस्थितियों के बीच ऐसा गठबंधन बनाना आसान नहीं होगा।

नेतन्याहू की सत्ता पर मंडराया खतरा

इजरायल पिछले कई वर्षों से राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध ने देश की राजनीति को भी प्रभावित किया है।

अब चुनाव में बहुमत खोने के बाद नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, गादी आइसेनकोट के पास नई सरकार बनाने का मौका है।

हालांकि, छह सप्ताह के भीतर बहुमत जुटाना और अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों को एक साथ लाना उनके राजनीतिक कौशल की बड़ी परीक्षा होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या आइसेनकोट गठबंधन सरकार बनाने में सफल होंगे या इजरायल की राजनीति में एक बार फिर नया मोड़ आएगा।

 

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