बार-बार ब्लड टेस्ट कराना पड़ सकता है भारी! एक्सपर्ट ने बताया कब जरूरी है जांच और कब नहीं

बार-बार ब्लड टेस्ट कराना पड़ सकता है भारी! एक्सपर्ट ने बताया कब जरूरी है जांच और कब नहीं

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आजकल हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ी है और इसके साथ ही ब्लड टेस्ट कराने का चलन भी तेजी से बढ़ा है। हल्की थकान महसूस होते ही विटामिन B12 की जांच, वजन बढ़ने पर थायरॉयड टेस्ट या फिर फिटनेस के नाम पर पूरा हेल्थ पैकेज—कई लोग बिना जरूरत बार-बार ब्लड टेस्ट करा रहे हैं। लेकिन क्या ऐसा करना सही है? विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा ब्लड टेस्ट कई बार फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान का कारण बन सकते हैं।

मामूली बदलाव देखकर घबराना ठीक नहीं

कई बार ब्लड रिपोर्ट में किसी एक पैरामीटर की वैल्यू सामान्य सीमा से थोड़ा ऊपर या नीचे आ जाती है। इसका मतलब हमेशा गंभीर बीमारी नहीं होता। हालांकि, ऐसे परिणाम देखकर लोग घबरा जाते हैं और फिर एक के बाद एक नई जांचें, डॉक्टर के चक्कर और अनावश्यक इलाज शुरू हो जाता है। इसलिए सिर्फ इसलिए बार-बार टेस्ट कराना कि वह आसानी से उपलब्ध है, सही नहीं माना जाता।

डॉक्टर की सलाह पर ही कराएं जांच

यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद के इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. संतोष कुमार अग्रवाल के अनुसार, ब्लड टेस्ट हमेशा व्यक्ति के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जोखिम कारकों को ध्यान में रखकर ही कराए जाने चाहिए। यदि कोई स्पष्ट चिकित्सीय कारण नहीं है, तो बार-बार जांच कराने से बचना बेहतर होता है।

किन टेस्टों को लोग सबसे ज्यादा दोहराते हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक, लोग अक्सर इन जांचों को जरूरत से ज्यादा बार कराते हैं—

  • विटामिन D
  • विटामिन B12
  • थायरॉयड फंक्शन टेस्ट (TFT)
  • HbA1c
  • कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल
  • कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC)

अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी नहीं है, इलाज में कोई बदलाव नहीं हुआ है और कोई नया लक्षण भी सामने नहीं आया है, तो इन जांचों को बार-बार कराने से आमतौर पर कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता।

बार-बार ब्लड टेस्ट कराने के नुकसान

जरूरत से ज्यादा ब्लड टेस्ट कराने से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं—

  • रिपोर्ट में मामूली बदलाव देखकर मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
  • फॉल्स पॉजिटिव (गलत तरीके से असामान्य) रिपोर्ट आने का खतरा रहता है।
  • अनावश्यक अतिरिक्त जांच और इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
  • बेवजह आर्थिक खर्च बढ़ सकता है।
  • बार-बार खून निकालने से सूजन, नील पड़ना और नसों में जलन हो सकती है।
  • कुछ मामलों में, खासकर महिलाओं में, लगातार ब्लड निकाले जाने से एनीमिया का खतरा भी बढ़ सकता है।

ब्लड टेस्ट स्वास्थ्य की जांच का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन हर छोटी परेशानी पर बार-बार टेस्ट कराना सही नहीं है। विशेषज्ञों की सलाह है कि जांच तभी कराएं जब डॉक्टर इसकी जरूरत बताए या कोई स्पष्ट लक्षण, बीमारी या जोखिम कारक मौजूद हो। सही समय पर और सही वजह से कराया गया ब्लड टेस्ट ही वास्तव में आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित होता है।

 

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