गुलाबी सुंडी से बचाएंगे फेरोमोन ट्रैप, किसानों को समय रहते निगरानी की सलाह
गुलाबी सुंडी से बचाएंगे फेरोमोन ट्रैप, किसानों को समय रहते निगरानी की सलाह
सरसा, सच कहूँ/पवन कुमार। कपास की फसल को गुलाबी सुंडी से बचाने के लिए फेरोमोन ट्रैप प्रभावी साबित हो रहे हैं। किसानों के फीडबैक में भी इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में किसान अपने खेतों में फेरोमोन ट्रैप लगा रहे हैं। यह जानकारी बुधवार को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशन में हुए संयुक्त सर्वेक्षण के दौरान सामने आई। क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र (आरसीआईपीएमसी), फरीदाबाद और संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) सरसा की टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कपास की फसल का निरीक्षण किया। संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) डॉ. आत्मा राम गोदारा ने बताया कि सरसा, फतेहाबाद, हिसार, हांसी, भिवानी, चरखी दादरी और जींद जिलों में करीब 120 फेरोमोन ट्रैप लगाए गए हैं।
जिन किसानों ने इनका प्रयोग किया, उन्होंने गुलाबी सुंडी की निगरानी और नियंत्रण में बेहतर परिणाम मिलने की बात कही। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि वे प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप तथा रस चूसने वाले कीटों की निगरानी के लिए 20 पीले या नीले स्टिकी ट्रैप लगाएं। इससे कीटों की संख्या का समय पर पता लगाया जा सकता है और आवश्यकता होने पर ही अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए। इससे उत्पादन लागत घटेगी और अनावश्यक रसायनों के उपयोग से भी बचाव होगा। सर्वेक्षण के दौरान अधिकारियों ने किसानों को एनपीएसएस मोबाइल ऐप की जानकारी भी दी।
उन्होंने बताया कि इस ऐप के जरिए किसान फसल में लगने वाले कीट एवं रोगों की पहचान, निगरानी और नियंत्रण संबंधी वैज्ञानिक सलाह तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि फिलहाल कपास में गुलाबी सुंडी और अन्य कीटों का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर (ईटीएल) से नीचे है। ऐसे में किसानों को घबराने के बजाय नियमित निगरानी और एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई।