Haryana Railway News: यमुनानगर समेत इन शहरों में बिछाई जाएगी नई रेलवे लाइन, किसानों की जमीन का होगा अधिग्रहण, रॉकेट की तरह बढ़ने लगे जमीनों के भाव
करनाल-यमुनानगर के बीच घटेगी 50 किलोमीटर की दूरी
प्रतापनगर (सच कहूँ/राजेन्द्र कुमार)। Haryana Railway News: हरियाणा में रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य की दो महत्वपूर्ण नई रेल लाइन परियोजनाओं करनाल-यमुनानगर (61 किलोमीटर) और जींद-हांसी (50 किलोमीटर) के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। रेल मंत्रालय और हरियाणा सरकार के संयुक्त उपक्रम हरियाणा रेल अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (HRIDC) ने दोनों परियोजनाओं का विस्तृत सर्वेक्षण (Detailed Survey) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है।
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि इन दोनों नई रेल लाइनों के निर्माण से प्रदेश के लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद दोनों परियोजनाओं की डीपीआर रेल मंत्रालय को भेज दी गई है। परियोजनाओं के निर्माण पर होने वाला खर्च हरियाणा सरकार और रेल मंत्रालय संयुक्त रूप से वहन करेंगे।
2,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत
प्रवक्ता के अनुसार, करनाल-यमुनानगर रेल लाइन परियोजना की अनुमानित लागत 1,173 करोड़ रुपये है, जबकि जींद-हांसी रेल लाइन परियोजना पर लगभग 923 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस प्रकार दोनों परियोजनाओं पर कुल 2,096 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।
करनाल-यमुनानगर के बीच घटेगी 50 किलोमीटर की दूरी
प्रस्तावित करनाल-यमुनानगर रेल लाइन दिल्ली-अंबाला रेलवे मार्ग के भैनी-खुर्द स्टेशन को अंबाला-सहारनपुर रेल लाइन के जगाधरी वर्कशॉप स्टेशन से जोड़ेगी। इस नई रेल लाइन पर पांच नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें राम्भा, इंद्री, लाडवा, रादौर और दमला शामिल हैं।
नई रेल लाइन बनने से करनाल और यमुनानगर के बीच यात्रा की दूरी लगभग 50 किलोमीटर कम हो जाएगी। इससे दोनों प्रमुख औद्योगिक शहरों के बीच तेज और सुगम रेल संपर्क स्थापित होगा। साथ ही इस परियोजना से हरिद्वार के लिए भी बेहतर और सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने का रास्ता खुलेगा, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी।
उद्योग और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इन नई रेल परियोजनाओं के पूरा होने से हरियाणा के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को नई गति मिलेगी। माल परिवहन आसान होने से उद्योगों को लाभ मिलेगा, वहीं किसानों को अपनी उपज बाजारों तक कम समय और कम लागत में पहुंचाने में सुविधा होगी। इसके अलावा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
इन दोनों रेल परियोजनाओं को हरियाणा के बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब रेल मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।