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पंजाब की जेलों की दुर्दशा

रअसल किसी भी पार्टी ने राज्य की जेलों में सुरक्षा कानून लागू करने की गंभीर कोशिश नहीं की। पिछले कई सालों से जेलों में कैदियों से एक दिन में 5-7 मोबाइल फोन बरामद होने की घटनाएं आम घट रही हैं। फिरोजपुर, फरीदकोट व बठिंडा जेल हमेशा ही सुर्खियों में रही है। जेलों में नशा तस्करी के मामले भी आम हैं।
सम्पादकीय 

राष्ट्रीय कलाकारों की दुर्दशा क्यों

यह भी बात नहीं कि देश में कला की संभाल के लिए कोई मार्गदर्शक इतिहास नहीं है। प्राचीन से लेकर मध्यकाल तक कलाकारों/साहित्यकारों को समय के शासकों द्वारा जागीरें देकर सम्मान देने की परंपरा रही है तब पुरुस्कार कम व आवश्यकता की वस्तु जैसे पैसे व जायदाद को अधिक महत्व दिया जाता था।
सम्पादकीय 

भारत में वृद्धजनों की दुर्दशा चिंतनीय

नीचे गिरे सूखे पत्तों पर जरा अदब से पैर रखिए, कभी कड़ी धूप में इन्हीं से छाव मांगी थी तुमनें। किसी लेखक की यह पंक्तियां कृतज्ञता के भावों को श्रेष्ठ रूप में अभिव्यक्त करने के साथ वर्तमान पीढ़ी के अपने कर्तव्यों से विमुख होने पर सटीक ईशारा करती है। हाल ही में हेल्पेज इंडिया ने […]
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