पंजाब की जेलों की दुर्दशा

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(Jails of Punjab)

पंजाब में जेलों की दुर्दशा व सरकारी लापरवाही का आलम यह है कि गत दिवस तीन कैदी अमृतसर जेल तोड़कर फरार हो गए। किसी वक्त कांग्रेस पार्टी अकाली-भाजपा सरकार पर जेलों की बदहाल सुरक्षा व्यवस्था संबंधी आरोप लगाती नहीं थकती थी कि सरकार की लापरवाही के कारण 2016 में नाभा जेल ब्रेक कांड हुआ। अब स्पष्ट है कि कांग्रेस कार्यकाल में भी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की हालत कोई ज्यादा पुख्ता नहीं। जेलों को मॉर्डन बनाने के दावे केवल घोषणाओं तक ही सीमित होकर रह गए हैं।

क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण भी जेलें बदहाल हैं।

दरअसल किसी भी पार्टी ने राज्य की जेलों में सुरक्षा कानून लागू करने की गंभीर कोशिश नहीं की। पिछले कई सालों से जेलों में कैदियों से एक दिन में 5-7 मोबाइल फोन बरामद होने की घटनाएं आम घट रही हैं। फिरोजपुर, फरीदकोट व बठिंडा जेल हमेशा ही सुर्खियों में रही है। जेलों में नशा तस्करी के मामले भी आम हैं। इसके बावजूद पंजाब के जेल मंत्री सुखजिन्द्र रंधावा जेलों में सुधार नहीं कर सके। जेलों में गुंडागर्दी भी बढ़ रही है।

विगत दिनों लुधियाना जेल में सैकड़ों कैदियों ने हंगामा किया था। जेलों की दुर्दशा का खमियाजा महेन्द्रपाल बिट्टू जैसे विचाराधीन लोगों को भुगतना पड़ा जिनकी जेल के अंदर ही दो कैदियों ने हत्या कर दी थी। असुरक्षा, नशे, मोबाइल फोन व कई अन्य कारणों के चलते पंजाब की जेलें बदनाम हैं। जेलों की सुरक्षा का मामला केवल सीआरपीएफ तैनात होने कर देने से ही हल नहीं होगा, चूंकि अंदर की व्यवस्था स्वंय जेल अधिकारियों ने ही संभालनी है। कांग्रेस के एक विधायक ने भी इस मामले को जोर-शोर से उठाया था कि जो मंत्री अच्छा काम नहीं कर रहे उन्हें बदला जाना चाहिए, इसके बावजूद मंत्रियों के विभागों की समीक्षा नहीं हुई।

पंजाब सीमावर्ती राज्य होने के कारण यहां की जेलें संवेदनशील हैं, जहां किसी भी तरह का बड़ा जान-माल नुक्सान हो सकता है। ऐसा राज्य जहां 2 क्विंटल के करीब हेरोइन एक ही दिन में बरामद हो वहां की जेलों में नशा तस्करों की गतिविधियों पर सख्ती अत्यावश्यक है। नशा तस्कर जेलों में रहकर तस्करी का व्यापार चला रहे हैं। बेहतर हो, यदि जेल मंत्री राजनीतिक बयानबाजी की अपेक्षा जेलों की हालत सुधारने के प्रयास करें।

 

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