शिक्षा और रोजगार
Eye Donation: दुनिया से विदा होकर भी दो अंधेरी जिंदगियों में रोशनी भर गईं नारनौंद की राम मूर्ति इन्सां
बेटियों ने दिया अर्थी को कंधा, पति का शरीर भी मेडिकल रिसर्च के लिए किया था दान
नारनौंद/हिसार, (सच कहूँ/मुकेश)। इंसान इस दुनिया से जाने के बाद भी अपने नेक कर्मों से दूसरों के जीवन में रोशनी भर सकता है। ऐसा ही अनुकरणीय कार्य नारनौंद गांव की 80 वर्षीय राम मूर्ति इन्सां के सचखंड जाने के बाद उनके परिवार ने किया। बुधवार शाम करीब 3 बजे राम मूर्ति इन्सां का निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप परिजनों ने उनकी आंखें दान कर दीं। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से पहुंची टीम ने बुधवार रात नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। उनके नेत्रों से दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद है।
राम मूर्ति इन्सां के परिवार में बेटा धीरज इन्सां खेतीबाड़ी करता है। उनकी चार बेटियां हैं, जिनमें दो विवाहित हैं। बेटी अनीता इन्सां संस्कृत लेक्चरर हैं, जबकि बेटी रूपीका इन्सां पीजीआई रोहतक में असिस्टेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। परिवार ने बेटियों को बेटों के समान जिम्मेदारी और अधिकार दिए हैं। इसकी झलक वीरवार को अंतिम विदाई के दौरान भी देखने को मिली, जब चारों बेटियों ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया। ग्रामीणों ने बेटियों के इस कदम की सराहना करते हुए इसे बेटा-बेटी एक समान होने की मिसाल बताया।

राम मूर्ति इन्सां के पति हवा सिंह का 10 दिसंबर 2020 को निधन हुआ था। उनके निधन के बाद परिवार ने उनका पार्थिव शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए दान कर दिया था। अब राम मूर्ति इन्सां के नेत्रदान से भी जरूरतमंदों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद है। इस तरह परिवार ने शरीर दान और नेत्रदान के माध्यम से मानवता की सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाया है। इस अवसर पर ब्लॉक नारनौंद के ब्लॉक प्रेमी सेवक वीरेंद्र इन्सां, सच्ची-पक्की समिति के प्रेमी गोविंद इन्सां, गुरदयाल इन्सां, सच्चे नंबर सेवादार मोहनलाल इन्सां, कुलदीप इन्सां, वीरेंद्र इन्सां और राजकुमार इन्सां सहित अजय पाल इन्सां व बड़ी संख्या में साध संगत मौजूद रही।
माता-पिता से मिले सेवा के संस्कार
राम मूर्ति इन्सां के बेटे धीरज इन्सां ने बताया कि उनके माता-पिता कई सालों से डेरा सच्चा सौदा से जुड़े हुए थे, इस लिए उन्होंने बचपन से ही परिवार को इंसानियत की सेवा के संस्कार मिले हैं। उनका मानना था कि जरूरतमंद की मदद और मानवता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। इसी सोच के चलते उनका पूरा परिवार मानवता भलाई के कार्यों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि परिवार को इन सेवा कार्यों की प्रेरणा पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से मिली।
नेत्रदान समाज के लिए प्रेरणादायी: गोविंद इन्सां
डेरा सेवादार गोविंद इन्सां ने बताया कि डेरा सच्चा सौदा की ओर से कानून के दायरे में रहकर मानवता भलाई के कार्य किए जा रहे हैं। इनमें शरीर दान और नेत्रदान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राम मूर्ति इन्सां का नेत्रदान समाज के लिए प्रेरणादायी है और उनकी आंखें दो जरूरतमंद लोगों की जिंदगी में रोशनी लाने का माध्यम बनेंगी।