Ratnavali Festival News: रत्नावली महोत्सव में हरियाणवी लोकसंस्कृति, फैशन शो और पारंपरिक व्यंजनों की धूम

हरियाणा की सांस्कृतिक झलक देखनी है तो चले आईए रत्नावली

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कुरुक्षेत्र, (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। देशां में देश भारत, भारत में हरियाणा की लोकभावना हरियाणा की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली परंपराओं को अभिव्यक्त करती है। भारत की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत में हरियाणा की लोकसंस्कृति का अपना अलग स्थान है। यहां की मिट्टी में रची-बसी रागनियां, लोकगीत, सांग, लूर, रसिया, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और लोकजीवन की परंपराएं प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की परिचायक हैं।

रत्नावली के दूसरे दिन हरियाणवी फैशन शो में हरियाणा के अलग-अलग विश्वविद्यालयों से छात्र-छात्राओं ने लोक परिधानों को नवीन स्वरूप में प्रस्तुत कर धमाल मचा दिया। हरियाणवी फैशन शो में 15 से अधिक संस्थानों के 50 से अधिक विद्यार्थियों ने हरियाणवी लोक परिधानों के माध्यम से मंच पर हरियाणवी संस्कृति की छटा बिखेरी। फैशन शो में हरियाणवी पुरुष एवं महिला दोनों के परिधानों को नवीन स्वरूप में प्रस्तुत किया गया जिसमें  हरियाणवी घाघरा, धोती कुर्ता, चुंदडी, वायल, दामण, घाघरा, खायर, दुपट्टा, कुर्ती, गाती, पगडी, घाघरी, सौंपली, दुकानिया सहित अनेक लोक परिधानों को मंच पर प्रस्तुत किया गया।

33 विधाओं में 3 हजार कलाकार ले रहे भाग

सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने बताया कि चार दिवसीय रत्नावली महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 3 हजार से अधिक कलाकार 33 सांस्कृतिक विधाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा और परंपराओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आयोजन केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा के सामाजिक जीवन, लोकमान्यताओं, पारिवारिक संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज बनकर सामने आ रहा है।

रत्नावली के मंच पर कहीं रागनियों के माध्यम से लोकजीवन की संवेदनाएं सुनाई दे रही हैं तो कहीं लूर और रसिया नृत्य के माध्यम से पारंपरिक उत्सवधर्मिता दिखाई दे रही है। हरियाणवी सांग, लोकगीत, भजन, लोकवाद्य यंत्र, नाट्य प्रस्तुतियां और हरियाणवी फैशन शो प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को नए अंदाज में प्रस्तुत कर रहे हैं। वहीं पारंपरिक आभूषणों, पगड़ी, धोती-कुर्ता और महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से हरियाणा की पहचान को नई पीढ़ी से जोडे का प्रयास किया जा रहा है।

हरियाणवी व्यंजनों की महक ने जीता दर्शकों का दिल

रत्नावली समारोह में इस बार हरियाणवी लोकसंस्कृति के साथ-साथ पारंपरिक खानपान की खुशबू भी खूब बिखर रही है। समारोह में हरियाणवी व्यंजनों का स्वाद चखने के लिए दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। खासतौर पर पारंपरिक हरियाणवी मिठाई गोद के लड्डू और गुड़ का हलवा लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं।

समारोह के हरियाणवी क्राफ्ट सेक्शन में स्टॉल नंबर-4 पर तिलका कैट्स की ओर से लगाए गए स्टॉल पर पारंपरिक हरियाणवी व्यंजनों की आकर्षक श्रृंखला प्रस्तुत की गई है। यहां चना बाकली, गोद के लड्डू, गुड़ का हलवा, खीर, मालपुए और सरसों का साग जैसे देसी पकवान लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। यशपाल ने बताया कि हरियाणवी व्यंजन प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, ग्रामीण जीवनशैली और पारंपरिक खानपान की अनमोल धरोहर हैं। वहीं गुड़ का हलवा हरियाणा की देसी मिठास और घरों की पारंपरिक रसोई की याद दिलाता है। सरसों का साग, चना बाकली, खीर और मालपुए जैसे व्यंजन हरियाणवी खानपान की विविधता और विशिष्ट पहचान को प्रदर्शित करते हैं।

...नन्ही परी ने मोह लिया सबका मन

रत्नावली उत्सव में कैथल जिला के गांव उझाना की नन्ही बेटी मिक्षा ने हरियाणा परिधान में सबका मन मोह लिया। जैसे ही मिक्षा हरियाणवी परिधान में रत्नावली कार्यक्रम में पहुंची तो सभी का ध्यान मिक्षा ने अपनी ओर खींच लिया। मिक्षा ने कहा कि हरियाणा में परिधान में आना उसे पसंद है। जब लोग मिक्षा की विडियो बना रहे थे तो उसके अंदर का कलाकार जाग रहा था और वह ऐसे अंदाज में चल रही थी जैसे रैंप पर चल रही हो।

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