Haryana News: जानिये, हरियाणा के इस गांव से रावण का क्या था रिश्ता, क्यों खाली कराया जा रहा है गांव!

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कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। Haryana News: गांव पोलड़ को धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, यह स्थल रावण के दादा पुलस्त्यमुनि की तपोस्थली रहा है। मान्यता है कि पुलस्त्यमुनि ने यहां सरस्वती नदी के किनारे स्थित इक्षुपति तीर्थ पर तपस्या की थी। ग्रामीण यह भी मानते हैं कि रावण का बचपन इसी स्थान पर बीता। गांव में स्थापित सरस्वती मंदिर और सैकड़ों वर्ष पुराना शिवलिंग इसकी ऐतिहासिकता को दशार्ते हैं। इतिहासकार प्रो. बीबी भारद्वाज बताते हैं कि यह स्थान एक प्राचीन नगर था जो प्राकृतिक आपदा के कारण उजड़ गया। बाद में इसे पुन: बसाया गया और इसका नाम ‘थेह पोलड़’ पड़ा। ‘थेह’ का अर्थ होता है वह स्थान जहां कभी कोई बस्ती रही हो।क्या है मामला गांव पोलड़ को रावण के दादा पुलस्त्यमुनि तपोस्थली माना जाता है। कैथल – पटियाला मार्ग पर सरस्वती नदी के किनारे बसे गांव पोलड़ में थेह की काफी धार्मिक मान्यता है। Haryana News

यहां माता सरस्वती का मंदिर भी स्थापित हैं। जहां कई सैकड़ों वर्षों पुराना शिवलिंग भी है। अब यह गांव सीवन नगरपालिका के अधीन आ चुका है। जो हाल ही में नई बनी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा अब गांव पोलड़ को खाली करने के आदेश दिए गए है। जिसके बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया है। विभाग ने गांव के 206 घरों को नोटिस भेजकर जल्द से जल्द मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। गांव खाली करवाने के आदेशों के बाद ग्रामीण गुहला से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस को मिले और ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने विधायक से गांव को खाली कराने के आदेशों को रद्द करवाने की। अपील की। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपने घर किसी भी हालत में नहीं छोड़ेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि यह हमारी पूर्वजों की धरोहर है। हम यहां से हटेंगे नहीं, चाहे कुछ भी हो जाए। Haryana News

ग्रामीणों ने कहा कि अब तक गांव में पुरातत्व विभाग द्वारा तीन बार खुदाई की जा चुकी है, पर कोई ऐतिहासिक अवशेष नहीं मिले। इसके बावजूद उन्हें बेघर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे वे अन्यायपूर्ण मानते हैं।पुरातत्व विभाग ने कोर्ट में दायर की थी याचिकागांव पोलड़ की जमीन को ऐतिहासिक घोषित करते हुए पुरातत्व विभाग ने पूर्व में कई बार खुदाई करवाई है। विभाग का कहना है कि यहां अति प्राचीन व दुर्लभ वस्तुएं मिल सकती हैं, इसलिए संरक्षित किया जाना जरूरी है। कोर्ट में विभाग की याचिका के बाद ही गांव को खाली करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।पहले बसाने की योजना बनाई जाए : ग्रामीणगांववासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वे कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे। प्रदर्शन, धरना और न्यायालय तक जाने की योजना बनाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार यदि वाकई संरक्षण चाहती है, तो पहले उन्हें बसाने की योजना पेश करें। Haryana News

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