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एनजीओ के सफाई कर्मियों के टेंडर में फर्जीवाड़े का आरोप, नगर परिषद कार्यालय पर धरना

400 कर्मचारियों का टेंडर, लेकिन मैदान में मात्र 150 कर्मी होने का दावा, जांच और कार्रवाई की मांग

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NGO Sanitation Workers' Protests: हनुमानगढ़। नगर परिषद में एनजीओ के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों के टेंडर में कथित फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मंगलवार को नगर परिषद के स्थायी सफाई कर्मचारियों ने टाउन स्थित नगर परिषद कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व नगर अध्यक्ष परितोष सारस्वत के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

धरने को संबोधित करते हुए परितोष सारस्वत ने कहा कि नगर परिषद में पिछले 8 से 10 वर्षों से एनजीओ के माध्यम से सफाई कार्य कराया जा रहा है। नगर परिषद प्रशासन ने टाउन और जंक्शन क्षेत्र की सफाई व्यवस्था के लिए करीब 400 सफाई कर्मचारियों का टेंडर जारी किया हुआ है, लेकिन शहर में इतनी संख्या में कर्मचारी कहीं दिखाई नहीं देते। उन्होंने कहा कि शहर की बिगड़ी हुई सफाई व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि टेंडर में दर्शाई गई संख्या के अनुरूप कर्मचारी कार्य नहीं कर रहे।

उन्होंने आरोप लगाया कि 400 कर्मचारियों का भुगतान उठाया जा रहा है, जबकि वास्तविक रूप से करीब 150 कर्मचारी ही फील्ड में कार्यरत हैं। इसके बावजूद नगर परिषद के अपने स्थायी सफाई कर्मचारी भी मौजूद हैं। सारस्वत ने कहा कि पिछले पांच-छह वर्षों से फर्जी हाजिरी लगाकर भुगतान उठाने का खेल चल रहा है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि एनजीओ के माध्यम से कार्य कर रहे मजदूरों से मात्र 6 हजार रुपए प्रतिमाह में काम कराया जा रहा है, जिससे वाल्मीकि समाज के श्रमिकों का शोषण हो रहा है।

उन्होंने कहा कि अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई करने के नाम पर भी भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में एनजीओ कार्यालय में जाकर कुछ दस्तावेजों की जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई हैं। सारस्वत ने नगर परिषद आयुक्त से मांग की कि 400 सफाई कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए और बताया जाए कि कौन कर्मचारी किस क्षेत्र में कार्यरत है।

प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने, दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा वर्तमान टेंडर को निरस्त कर नई प्रक्रिया अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों को उनके श्रम के अनुरूप पूरा पारिश्रमिक और अधिकार मिलने चाहिए, क्योंकि वे शहर को स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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