राफेल सौदे में भ्रष्टाचार पर सफाई दें पीएम : कांग्रेस

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2016 में  भारत-फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमान को लेकर हुआ था समझौता

(Corruption in Rafale Deal)

नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कांग्रेस ने कहा है कि ताजा खुलासे से साफ हो गया है कि 60 हजार करोड़ रुपए के राफेल विमानों की खरीद में बड़े स्तर पर दलाली हुई है और इसमें सरकार ने अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने का काम किया है, इसलिए खुलासे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सफाई देनी चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीपसिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि फ्रांस के समाचार माध्यम मीडियापार्ट ने दावा किया है कि 2016 में जब भारत-फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमान को लेकर समझौता हुआ। इस समझौते के बाद इस खरीद में बिचौलिया का काम करने वाली भारत की एक कंपनी को दलाली के तौर पर 10 लाख यूरो का भुगतान किया गया।

23 सितम्बर 2016 में आॅडिट से पता चला कि कंपनी ने 10 लाख यूरो का भुगतान किया और उसे उपहार बताया : सुरजेवाला

उन्होंने कहा कि राफेल सौदे में दलाली का खुलासा तब हुआ जब फ्रांस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने विमान बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट के खातों का आॅडिट किया। इस आॅडिट रिपोर्ट के आधार पर मीडियापार्ट ने अपनी खबर में दावा किया है कि 2016 में राफेल विमान सौदे से जुड़ी सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी की तरफ से ह्यउपहारह्ण स्वरूप यह राशि भारत के एक बिचौलिया को दी गयी थी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि 23 सितम्बर 2016 में आॅडिट से पता चला कि कंपनी ने 10 लाख यूरो का भुगतान किया और उसे उपहार बताया गया। उसके बाद 30 मार्च 2017 को राफेल कंपनी ने एक बयान में कहा था कि उसने यह पैसा राफेल का मॉडल बनाने के लिए दिया था। सवाल यह है कि जो कंपनी खुद विमान बनाती है तो उसने भारत की कंपनी को मॉडल बनाने का आदेश क्यों दिया और इस राशि को उपहार क्यों कहा गया।

क्या है पूरा मामला (Corruption in Rafale Deal)

राफेल विमानों की खेप भारत आने लगी है लेकिन इन विमानों के सौदे को लेकर सवाल उठने अभी बंद नहीं हुए हैं। देश में चुनावी मुद्दा बनने से लेकर विपक्ष के तमाम आरोपों से गुजरते हुए राफेल सौदे को कोर्ट से हरी झंडी मिल चुकी है। अब फ्रांस की समाचार वेबसाइट मीडिया पार्ट ने राफेल पेपर्स नाम से आर्टिकल प्रकाशित किए हैं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है।रिपोर्ट के मुताबिक राफेल लड़ाकू विमान डील में गड़बड़ी का सबसे पहले पता फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी एएफए को 2016 में हुए इस सौदे पर दस्तखत के बाद लगा।

एएफए को ज्ञात हुआ कि राफेल बनाने वाली कंपनी दसौ एविएशन ने एक बिचौलिए को 10 लाख यूरो देने पर रजामंदी जताई थी। यह हथियार दलाल इस समय एक अन्य हथियार सौदे में गड़बड़ी के लिए आरोपी है। हालांकि एएफए ने इस मामले को प्रोसिक्यूटर के हवाले नहीं किया।

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