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    अपनी ही पुलिस से इंसाफ मांग रहे पंचकूला हिंसा के दौरान निलंबित पुलिसकर्मी

    Suspended policeman

    -अदालत ने हटाई देशद्रोह की धारा, लेकिन पुलिस विभाग से राहत नहीं | Suspended policeman

    पंचकूला(सच कहूँ न्यूज)। 25 अगस्त 2017 को पंचकूला सीबीआई कोर्ट में फैसला आने के बाद (Suspended policeman) भड़की हिंसा के बाद हरियाणा पुलिस ने अपने ही कई पुलिस कर्मचारियों पर सख्त एक्शन लेते हुए न केवल उन्हें बर्खास्त कर दिया था बल्कि उनके खिलाफ देशद्रोह जैसी संगीन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज कर दिए गए जबकि उन पुलिसकर्मियों का कोई कसूर नहीं था। बस वे तो केवल पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की सुरक्षा में तैनात थे व अपनी ड्यूटी कर रहे थे।

    पुलिस विभाग ने अपने ही बेकसूर मुलाजिमोंं को विभिन्न तरह की संगीन धाराओं में फंसा दिया और अभी भी विभाग की और से उन्हें कोई राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है जबकि अदालत ने इन सुरक्षाकर्मियों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए पुलिस द्वारा इनके खिलाफ लगाई गई देशद्रोह की धाराएं हटा दी हैं लेकिन इन पुलिसकर्मियों को मलाल है कि उनके अपने विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उन्हें राहत देने की बजाए फंसाने पर तुले हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी हाल ही में 24 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान एफआईआर नं. 336 में अदालत ने बचाव पक्ष के तथ्यों पर सहमति जताते हुए एफआईआर में शामिल हरियाणा पुलिसकर्मियों सहित 22 लोगों से देशद्रोह की धारा दी लेकिन विभाग की और से इन कर्मियों को कोई न्याय नहीं मिल रहा। जबकि हरियाणा पुलिस इन पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी के अलावा विभिन्न धाराओं में मुकदमा चला रही है।

    -पंचकूला हिंसा के बाद 2 पुलिसकर्मियों को निलंबित तो 5 हुए थे बर्खास्त

    जानें क्या है पूरा मामला

    25 अगस्त 2017 को पंचकूला में भड़की हिंसा के बाद हरियाणा पुलिस ने पूज्य गुरु जी की सुरक्षा में तैनात हरियाणा व राजस्थान पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड व 5 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया था। सस्पेंड कर्मचारियों में हरियाणा पुलिस के राजेश, अमित व राजेश एवं बर्खास्त कर्मचारियों में हरियाणा पुलिस के कृष्णदास, विजय, रामसिंह, अजय तथा एक राजस्थान पुलिस का कर्मचारी ओपी बुडानिया शामिल है। इन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ देशद्रोह जैसी अनेक संगीन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज कराए गए थे जबकि इनका कोई कसूर नहीं था।

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