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    अमेरिकी सांसदों ने की पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने की मांग, पाकिस्तान में मचा हड़कंप

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    Washington अमेरिकी सांसदों ने की पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने की मांग, पाकिस्तान में मचा हड़कंप

    नई दिल्ली। वाशिंगटन से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद प्रमिला जयपाल की अगुवाई में अमेरिकी संसद के कई सदस्यों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को एक पत्र लिखकर उनसे पाकिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सांसदों का कहना है कि ‘प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की सरकार’ में मानवाधिकार संकट और ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ बढ़ता जा रहा है, इसलिये उनपर वीजा बैन से लेकर संपत्ति ‘फ्रीज’ तक कई तरह के प्रतिबंध लगाये जाएं। सुश्री जयपाल की ओर से बुधवार को सार्वजनिक किये गये इस पत्र में अमेरिका में प्रभावित लोगों की सुरक्षा और इस्लामाबाद के साथ डील में मानवाधिकार स्तर को बनाये रखने के लिये उठाये जा रहे कदमों पर अमेरिकी प्रशासन से औपचारिक जवाब भी मांगा गया है।

    पत्र में इन घटनाओं को पाकिस्तान में लोकतंत्र के पतन के एक बड़े पैटर्न से जोड़ा गया है, जिसमें पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज पर कार्रवाई का जिÞक्र किया गया है। पत्र में लिखा गया, “हाल के सालों में, पाकिस्तान में तानाशाही के गलत इस्तेमाल के खिलाफ बोलने वाले अमेरिकी नागरिकों और निवासियों को धमकियों, डर और परेशानी का सामना करना पड़ा है। ये परेशानियां अक्सर पाकिस्तान में उनके परिवारों तक भी पहुंच जाती हैं।” पत्र में लिखा गया, “इन तरीकों में मनमाने ढंग से हिरासत में लेना, जबरदस्ती करना और हिंसा करना शामिल है। सरकार इन तरीकों से बाहर से आए लोगों और उनके रिश्तेदारों को निशाना बनाती है।”

    सांसदों ने कहा कि इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका की जमीन पर विदेशी दखल के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा, “हालांकि हम मानते हैं कि आतंकवाद-विरोध और दूसरे मुद्दों पर अमेरिका-पाकिस्तान साझेदारी अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये जरूरी है, लेकिन यह साझेदारी मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक शासन और कानून के राज के लिये आपसी प्रतिबद्धता पर आधारित होनी चाहिये।” सांसदों ने दावा किया कि पाकिस्तान तानाशाही शासन की तरफ और बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को बिना किसी औपचारिक आरोप के जेल में डाला जा रहा है, स्वतंत्र पत्रकारों को धमकाया जा रहा है या देश निकाला दिया जा रहा है, और नागरिकों को आॅनलाइन गतिविधि के लिये हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और बलूचिस्तान सहित अन्य जातीय समूहों पर बढ़ते खतरे की ओर भी इशारा किया। सांसदों का कहना है कि ये समूह सरकारी दमन का खामियाजा भुगत रहे हैं।

    सांसदों ने ऐसी घटनाओं को नागरिक समाज को कुचलने और सैन्य शासन की सभी चुनौतियों को खत्म करने की एक सोचे-समझे साजिश करार देते हुए कहा, “पाकिस्तान तानाशाही के बढ़ते संकट का सामना कर रहा है, जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं और बुनियादी आजादी को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है।” पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने पूछा कि अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के साथ इस तरह से कैसे जुड़ने का प्लान बना रहा है, जिससे मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के लिये अमेरिका के बताये गये वचनों को बनाये रखा जा सके, और तानाशाही व्यवहार को सही ठहराने की किसी भी सोच से बचा जा सके। उन्होंने विदेश विभाग से 17 दिसंबर तक लिखकर जवाब देने को कहा है।