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Thursday, April 16, 2026
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    गुलाब की खुशबू से महका नुहियांवाली का ‘साध बेला धाम’

    'Sadh Bela Dham' of Nuhianwali, scented with rose fragrance

    कोरोना काल में तैयार किया करीब 20 क्विंटल गुलकंद, मिठास का हर कोई कायल

    • साध-संगत की सेवा एवं पूज्य गुरू जी के आशीर्वाद से ही संभव : जुगती राम इन्सां

    • हरी मिर्च, तरबूज व प्याज ने बनाया जिलाभर में रिकॉर्ड

    सच कहूँ/राजू ओढां। गुलकंद, तरबूज, आड़ू, अमरूद व चीकू की मिठास एवं फल-सब्जियों के उत्पादन की बात आती है तो सरसा जिले के गांव नुहियांवाली में स्थित डेरा सच्चा सौदा की शाखा साध बेला धाम आश्रम का जिक्र बरबस ही जुबां पर आ जाता है। इस आश्रम की फल-सब्जियों व गुलकंद ने पूरे जिले में एक अलग ही पहचान बनाई है। यहां की सब्जियां, फल व गुलकंद ग्रामीण ही नहीं अपितु आस-पड़ोस के अलावा दूर-दराज के लोग भी खरीदने आते हैं।

    आश्रम में वृद्ध सत ब्रह्मचारी सेवादार जुगती राम ने बताया कि पूज्य गुरू जी की रहमत से आश्रम की करीब 12 कैनाल जगह में एक वर्ष में अच्छी पैदा उठाकर ये साबित कर दिखाया कि अगर आधुनिक ढंग से खेती की जाए तो कम जगह में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। उन्होंने इसका श्रेय पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी के पावन आशीर्वाद और साध-संगत के असीम सेवा भाव को दिया है। उन्होंंने बताया कि आश्रम में गांव के अलावा आस-पड़ोस के गांवों से भी सेवादार सेवा करने आते हैं।

    खुशबू से होता है स्वागत, मिठास बिखेर रहा गुलकंद :-

    आश्रम में प्रवेश करते ही गुलाब की महक से आगंतुक का स्वागत होता है। आश्रम के रास्ते के दोनों ओर गुलाब के पौधे लगाए गए हैं। जिनसे न केवल आश्रम में महक बनी रहती है, अपितु ये आमदन का भी एक अच्छा स्त्रोत है। सेवादार के अनुसार कोरोना के दौरान आश्रम में करीब 20 क्विंटल गुलकंद तैयार किया गया। जिम्मेवार सेवादार जुगती राम ने बताया कि इस समय आश्रम गुलाब की खुशबू से महक रहा है। गुलाब हर रोज तैयार हो रहे हैं। यहां ताजा गुलकंद तैयार किया जाता है।

    आश्रम में इस वक्त हर रोज करीब 10 किलो गुलकंद तैयार किया जाता है। गुलकंद को केवल ग्रामीण ही नहीं अपितु आस-पड़ोस के गांवों के लोग भी खरीदने आते हैं। नुहियांवाली आश्रम से तैयार हुआ गुलकंद आस-पड़ोस के गांवों के अलावा हरियाणा, पंजाब व राजस्थान तक अपनी मिठास बिखेर रहा है। क्योंकि आश्रम में बाहर से आने वाली साध-संगत यहां से गुलकंद बड़े चाव से खरीदती है। यहां के गुलकंद की विशेष बात इसका बेमिसाल स्वाद और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना है।

    जगह थोड़ी-आमदन बड़ी :-

    नुहियांवाली का ये आश्रम करीब 18 कैनाल जगह में है। जिसमें करीब 12 कैनाल जगह खेती के लिए प्रयोग में आती है। इस जगह में किन्नू, अमरूद, पपीता, तरबूज, अनार, केला, आड़ू व चीकू तथा सब्जियों में हरा चना, प्याज, लहसुन, कद्दू, करेला, हरी मिर्च व भिंडी सहित अन्य मौसमी सब्जियां उगाई जाती हैं।

    इन फल-सब्जियों व गुलकंद से एक वर्ष में करीब 6 लाख रुपए की आमदन होती है। लोग आश्रम से हरी-सब्जियां व फल बड़े चाव से खरीदने आते हैं। विगत वर्ष आश्रम में करीब 3 कैनाल भ़ूमि में प्याज बोया था, जो तकरीबन 25 क्विंटल हुआ। प्याज का वजन व स्वाद देखकर हर कोई अचंभित नजर आया।

    तरबूज व हरी मिर्च बना चुके हैं रिकॉर्ड :-

    आश्रम में तरबूज व हरी मिर्च ने रिकॉर्ड कायम किया था। विगत वर्ष तरबूज की फसल बोई गई थी। तरबूज का वजन 12 किलो देखकर हर कोई अचंभित नजर आया। 4 कैनाल जगह में बोई गई हरी मिर्च की फसल से करीब 3 लाख रुपए की आमदन हुई थी। आश्रम में उगाई जाने वाली फल-सब्जियों की विशेषता ये है कि इनमें गोबर की खाद का इस्तेमाल अधिक किया जाता है। यही कारण है कि पौधे फसल सब्जियों से लदे नजर आते हैं।

    युवाओं के लिए प्रेरणा हैं सेवादार

    डेरा सच्चा सौदा में राम-नाम के साथ-साथ कड़ा परिश्रम करने की प्रेरणा दी जाती है। इसका उदाहरण नुहियांवाली के आश्रम में देखा जा सकता है। यहांं के जिम्मेवार सेवादार की उम्र 72 वर्ष है। ये सेवादार इस उम्र में भी युवाओं को मात दे रहे हैं। आश्रम में दिनभर कड़े परिश्रम के साथ नाम-सुमिरन व सादा भोजन इनकी दिनचर्या में शामिल है।

    जुगती राम को आश्रम में कस्सी चलाता देख उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। जुगती राम इन्सां कहते हैं कि पूज्य गुरू जी ने उन्हें यही प्रेरणा दी है कि नाम-सुमिरन के साथ-साथ कड़ा परिश्रम और सबसे नि:स्वार्थ प्रेम करना चाहिए। ये देह एक दिन मिट्टी में मिल जानी है। क्यों न इससे काम लिया जाए।

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