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    घोर लापरवाही…गुरुग्राम के व्यक्ति का 25 साल बाद मिला मृत्यु प्रमाण पत्र

    परिजनों ने सीएम विंडो पर दी थी शिकायत, तब मिला मृत्यु प्रमाण पत्र

    सच कहूँ/संजय मेहरा
    गुरुग्राम। इसे घोर लापरवाही ही कहा जाएगा कि 25 साल पहले जिस व्यक्ति की मृत्यु हुई थी, उसका अब मृत्यु प्रमाण पत्र मिला है। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए परिजनों ने 25 वर्षों तक नागरिक अस्पताल गुरुग्राम व नगर निगम गुरुग्राम के कार्यालयों के खूब चक्कर लगाए, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। अब सीएम विंडो पर शिकायत करने के बाद परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र मिल पाया है।
    जानकारी के अनुसार जिले के गांव घोषगढ़ खंड फर्रूखनगर निवासी दुलीचन्द ने सीएम विन्डो पर शिकायत दर्ज करवाई थी कि 26 सितम्बर, 1996 को हरियाणा राज्य परिवहन की बस से हुई दुर्घटना में उसके जीजा देशराज की मौत हो गई थी। एनओसी कटवाने के बाद भी 25 वर्षों तक उनका मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं हुआ था। उसे कभी नागरिक अस्पताल में दौड़ाया गया तो कभी नगर निगम में। पहले यहां नगर परिषद थी। नगर परिषद में भी उसके जीजा की मृत्यु का प्रमाण पत्र देने में लापरवाही की जाती रही। अधिकारियों, कर्मचारियों ने भी लापरवाही की सभी हदें लांघ दी। क्योंकि 25 साल का समय कम नहीं होता। किसी काम को करने के लिए कुछ दिन या महीने की लापरवाही हो तो भी जवाबदेही बनती है। यहां 25 साल तक लापरवाही होती रही। पीड़ित ने वरिष्ठ अधिकारियों तक भी अपनी बात पहुंचाई, लेकिन शायद ही किसी ने उसके काम को प्रमुखता से लिया हो। अगर लिया होता तो उसे कभी का यह प्रमाण पत्र मिल गया होता।

    वर्ष 1996 का रिकॉर्ड खंगालकर बनाया प्रमाण पत्र

    सीएम विन्डो पर दुलीचन्द ने इस बाबत शिकायत दी। सीएम विंडो की निगरानी कर रहे मुख्यमंत्री के ओएसडी भूपेश्वर दयाल के अनुसार प्रार्थी की शिकायत सीएम विंडो पर 1 अप्रैल, 2021 को शिकायत नम्बर 29987 अपलोड की गई थी। जिस पर तत्काल कार्यवाही करते हुए इस सन्दर्भ में गुरुग्राम के नागरिक अस्पताल को सूचित किया गया। अस्पताल के अधिकारियों तथा नगर निगम के अधिकारियों ने वर्ष 1996 का रिकॉर्ड खंगाला और प्रार्थी को 16 अगस्त, 2021 को मृतक देशराज का मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि इस काम के लिए जो 25 साल का समय लगा है, उसमें गलती किस स्तर पर हुई। कौन अधिकारी, कर्मचारी इसमें दोषी हैं, उन्हें भी इसकी सजा मिलनी चाहिए। क्योंकि यह अपने आप में एक घोर लापरवाही है। इतने वर्षों में शिकायतकर्ता कितनी बार परेशान हुआ होगा। उसने कितने धक्के खाए होंगे। सरकार को इस पर भी संज्ञान लेना चाहिए।

    अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होती है : भूपेश्वर दयाल

    ओएसडी भूपेश्वर दयाल का कहना है कि सीएम विंडो पर आई शिकायतों की समीक्षा की जाती है। सम्बंधित विभागों के अधिकारियों को तय सीमा में उनका समाधान करने के आदेश दिए जाते हैं। ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है।

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