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    यूक्रेन-रूस युद्ध का चौथा दिन: सुरक्षित स्थान में रुककर छात्र दे रहे स्वजनों को पल-पल की जानकारी

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    फ्लाइट कैंसिल होने से यूक्रेन में छात्र-छात्राएं, भारत में स्वजनों की अटकी सांसे

    • अभिभावक बोले, खर्किव में फंसे छात्रों को भी जल्द वतन लेकर आये सरकार

    सच कहूँ/सुनील वर्मा, सरसा। यूक्रेन (Ukraine-Russia War) पर लगातार चौथे दिन भी रूस का हमला जारी है। पढ़ाई करने गए भारतीय छात्र-छात्राएं युद्ध के चलते वहां पर फंस गए हैं और जैसे-तैसे किसी बंकर या सुरक्षित स्थान में रुक कर स्वजनों को जानकारी दे रहे हैं। खर्किव में कई मेडिकल यूनिवर्सिटी है, जिनमें वीएन कार्जिन यूनिवर्सिटी, खर्किव नेशनल यूनिवर्सिटी। यहां करीब एक हजार से अधिक छात्र छात्राएं अभी भी है। शहरों में रूसी सेना दाखिल हो चुकी है। वहां फंसे छात्रों के साथ साथ भारत में रह रहे उनके अभिभावक भी चिंतित है।

    हालांकि शनिवार को यूक्रेन से छात्रों के एक दल के भारत लौटने के बाद सरसा में भी अभिभावकों को कुछ राहत मिली है और आस बंधी है कि जल्द ही उनके बच्चे भी वतन लौट आएंगे। सरसा शहर की गांधी कालोनी में रहने वाले अश्वनी खन्ना की बेटी महक खर्किव की वीएन कार्जिन यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की दूसरे वर्ष की पढ़ाई कर रही है। उसके साथ नाथूसरी कलां की प्रीति भी है जो तीन महीने पहले ही यूक्रेन गई थी। अश्वनी खन्ना ने बताया कि दोनों छात्राओं की भारत वापसी की 26 फरवरी की टिकट थी। परंतु अचानक युद्ध भड़क गया और फ्लाइट्स कैंसिल हो गई।

    महक से उनकी रविवार सुबह बात हुई, उसने बताया कि वहां अब भी 350-450 छात्र हैं। इसके अलावा स्थानीय नागरिक भी बेसमेंट में शरण लिए हुए हैं। अभी वहां खाने पीने का सामान यूनिवर्सिटी के कांट्रेक्टर उपलब्ध करवा रहे हैं। लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ रही है। महक के पिता अश्वनी खन्ना व प्रीति के पिता रघुवीर सिंह कड़वासरा ने कहा कि सरकार छात्रों को निकालने का जल्द प्रबंध करें। उन्होंने कहा कि जहां छात्र घबराए हुए हैं। वहीं अभिभावकों को भी रात दिन चिंता सता रही है।

    दो किलोमीटर की दूरी पर ही घूम रहे रूसी के टैंक: शुभम

    लवीव यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे छात्र शुभम ने बताया कि लवीव में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं यहां से अभी तक कोई भी छात्र नहीं निकल पाया है। करीब एक हजार छात्र यहां फंसे हैं। यहां से रूस (Ukraine-Russia War) का बार्डर तो करीब 30 किलोमीटर ही दूर है जबकि पोलेंड, रोमानिया, हंगरी के बार्डर 1200 से 1600 किलोमीटर दूर है। उसने बताया कि उनकी एंबेसी से भी बात हुई परंतु उनका कहना है कि वे अभी कुछ नहीं कर सकते।

    यहां पिछले 24 घंटों में 600 से ज्यादा ब्लास्ट हो चुके हैं। उसने बताया कि उनसे दो किलोमीटर की दूरी पर ही रूसी टैंक घूम रहे हैं। उसने बताया कि खार्किव शहर से इजराइल के छात्रों को ले जाने के लिए वहां की सरकार ने प्रबंध किए हैं।

    यूक्रेन में फंसे नागरिकों की स्वदेश वापसी के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है सरकार: दुग्गल

    लोकसभा क्षेत्र के विकास एवं आमजन की सुविधा व समस्याओं के समाधान के प्रति संजीदा सांसद सुनीता दुग्गल द्वारा यूक्रेन में फंसे नागरिकों व विद्यार्थियों की स्वदेश वापसी के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए वे लगातार केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय एवं यूक्रेन के दूतावास से संपर्क बनाए हुए हैं ताकि जल्द से जल्द नागरिकों की स्वदेश में वापसी हो।

    इसके लिए सांसद ने बाकायदा अपने सरसा आवास एवं फतेहाबाद कार्यालय में कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई है। सांसद सुनीता दुग्गल भी स्वयं लोकसभा क्षेत्र के नागरिकों व विद्यार्थियों के परिजनों से संपर्क साध रही है और उन्हें किसी भी प्रकार की चिंता न करने व धैर्य रखने का मनोबल बढ़ा रही है।

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