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    लगातार 55 बार रक्तदान कर नरसिंह इन्सां ने बनाया रिकॉर्ड

    India Book Record

    पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा का कमाल

    • इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स में दर्ज हुआ नाम

    सरसा (सच कहूँ/रविन्द्र रियाज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की दया-मेहर रहमत से डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी इन्सानियत की नित नई-नई इबारत लिख रहे हैं। इसी क्रम में जरूरतमंद उपचाराधीन मरीजों का अमूल्य जीवन बचाते हुए शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सेवादार नर सिंह इन्सां ने लगातार 55 बार रक्तदान कर एक रिकॉर्ड स्थापित कर दिया, जो कि इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। (Welfare Work)

    49 वर्षीय नर सिंह इन्सां ने बताया कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल में 24 जुलाई 2007 को पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड का शुभारंभ किया था, उस दिन उन्हें इस ब्लड बैंक के प्रथम रक्तदाता होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। Welfare Work) पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से ही मैंने रक्त दान करना शुरू किया।

    किसी का जीवन बचाने की खुशी शब्दों में ब्यां नहीं हो सकती : नर सिंह इन्सां

    इसके पश्चात अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों के परिजनों को रक्त के लिए परेशान देखा तो संकल्प किया कि मैं किसी का जीवन बचाने का कोई मौका नहीं छोड़ूंगा Welfare Work) । क्योंकि पूज्य गुरु जी के वचन हैं कि मुश्किल में फंसे किसी जरूरतमंद की मदद करना ही सच्ची इन्सानियत है। इसके बाद वे हर तीन माह बाद पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड बैंक में रक्तदान करते आ रहे हैं और 2007 से 2021 तक लगातार 55 बार रक्तदान करने पर 3 मई 2022 को उनका नाम इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।

    India Book Record

    नर सिंह इन्सां अपने इस अद्भुत अनुभव को साझा करते हुए बताते हैं कि मेरा ब्लड ग्रुप ‘ए’ पॉजीटिव है। कई बार ऐसे मौके भी आए जब मरीज बिल्कुल मृत्यु शैया पर थे। परिजनों की आँखें आँसूओं से भीगी हुई थी और रक्त नहीं मिल रहा था। तब वे तुरंत पहुंचकर रक्तदान कर मरीज का जीवन बचाने में सहायक बने। वे कहते हैं कि करने वाला तो भगवान है, लेकिन किसी की जिंदगी बचाने से जो खुशी मिलती है, उसे शब्दों में ब्यां कर पाना मुश्किल है। इसलिए सभी को रक्तदान जरूर करना चाहिए, क्योंकि हमारा रक्तदान कब किसी के चेहरे की मुस्कान लौटा दे पता नहीं चलता।

    मौत के मुंह से बचाए मरीज

    वे बताते हैं कि कोरोना काल में जब लोग अपनों तक से किनारा कर रहे थे तो वे उपचाराधीन कोविड रोगियों के उपचार में मदद के लिए एक कॉल पर रक्तदान करने पहुंच जाते थे। इसके अलावा डेंगू और थैलीसीमिया पीड़ितों के लिए भी उन्होंने कई बार मौके पर पहुंचकर रक्तदान किया। वे कहते हैं कि मुसीबत में फंसे लोगों का जीवन बचाने की इस मुहिम को वे थमने नहीं देंगे और लगातार इसी तरह पूरे जोश, ज़ज्बे और जूनुन के साथ रक्तदान करते रहेंगे। उधर, पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड बैंक की प्रभारी डॉक्टर डॉ. कीर्ति इन्सां के मुताबिक, एक बार रक्तदान तीन जिंदगियों को बचा सकता है।

    मैं चाहता हूँ कि हर शख्स बेहिचक रक्तदान को आगे आए। जरूरतमंद मरीजों की मदद करे और रिकॉर्ड बनाए। लोगों की जिंदगी बचाकर मुझे जो खुशी मिलती है उसे मैं बयां नहीं कर सकता।

    -नर सिंह इन्सां

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