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    ईश्वर का संदेश आपके लिए, पढ़ें पूज्य गुरु जी के रूहानी टिप्स

    Saint Dr. MSG

    सरसा। बेशक आज हम 21वीं सदी में जी रहें हो। लेकिन आज भी हमारे भारत देश में पाखंडवाद पनप रहा है। हालांकि कुछ हद तक लोगों में जागरूकता आई है लेकिन ये पाखंडवाद की बीमारी पूरी तरह से से अभी खत्म नहीं हुई है। ये पाखंडवाद इतना खतरनाक है कि इसके चंगुल में फंसे लोग किसी दूसरे की जिन्दगी से भी खेल जाते हैं। ऐसे में आज ‘‘सच कहूँ संस्कारशाला’’ में पूरे विश्व में पाखड़वाद को खत्म करने का बीड़ा उठाने वाले सर्वधर्म संगम के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के अनमोल वचन आपके समक्ष प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

    अजब-गजब पाखंड

    पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जी ने कई बार लोग पाखंडों में फंस जाते है कि घर के सामने कोई टोना-टोटका करता है, क्या करें? ये सब पाखंड होता है। नारा लगाओ और उठा कर फेंक दो। कईयों को साइको (मानसिक वहम) हो जाता है। चप्पल उल्टी हो गई, अब लड़ाई होगी। अब तू 50 प्रसेंट तो लड़ाई के लिए पहले ही तैयार हो गया। अब दूसरे को ढूंढना है और फिर दूसरी की भी जूती उल्टी हो गई तो वो भी 50 प्रसेंट तैयार हो गया। आप कहीं जा रहे हो तो किसी ने पीछे से छींक मार दी तो भी गड़बड़! बहुत पाखंड हैं। फलां दिन को मत नहाओ। उस दिन को मत नहाओ। सब फिजूल की बातें हैं।

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    पेड़ों पर मन्नत पूरी करवाने के लिए लगी लाइनें

    पाखंडवाद त्यागने का आह्वान करते हुए पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि कुछ पाखंडवाद ने इन्सान को बर्बाद कर रखा है, कोई कह दे पेड़ पर मन्नत पूरी होती है तो लोगों की लाईनें लग जाती है वहां। पेड़ की पूजा करने लग जाते हैं। हालांकि पेड़ तो पूजनीय है ही। जो हमारी कार्बन डाई आॅक्साईड ले लेता है, हमारे लिए आॅक्सीजन छोड़ते रहते हैं। लेकिन लोग उनको ये मानते हैैं, धागे बांधते हैं कि बाबा सुख रखीं। बाबा क्या सुख रखेगा जो एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा सकता?

    पाखंडियों को मत चढ़ाओ पैसा

    कई बार ऐसा होता है आप लालच में किसी पाखंड़ी को पैसों दे देते हो, वो कहता है, मैं इसे दुगुने-चौगुने कर दूंगा। लेकिन दुगुने चौगुने क्या होने थे, जो पैसे थे वो भी लेकर चलता बनता है। ये सब ठग्गी करने के तरीके है, सब बकवास है, भगवान कभी किसी से लेता नहीं अल्लाह, वाहेगुरु, राम वो देता ही देता है इतना देता है कि झोलियां छोटी पड़ जाती है उसका रहमोंकर्म मूसलाधार बरसता रहता है। पर उसपर दृढ़-यकीन करना पड़गा।

    नवजात को घुंटी देने से कुछ नहीं होगा, बच्चा कर्म तो भगवान से लेकर आया है

    अकसर देखने में आया है कि जब नवजात बच्चा जन्म लेता है तो उसे घुंटी दी जाती है। ताकि बच्चा घुंटी देने वाले के जैसा बने, ये प्रथा समाज में बहुत फैली हैं। बच्चा कर्म तो भगवान की तरफ से लेके आया है, घुंटी से कुछ होता-जाता नहीं है। हमारे ख्याल से कोई फर्क ही नहीं पड़ता इससे। हां, कोई सुमिरन करके, मालिक का नाम लेकर कोई भक्तजन घुंटी देता है, तो उसका असर लाजमी होता है, क्योंकि उससे उस बच्चे के अंदर एक अलग-सा बीज चला जाता है, जो अंदर ही अंदर पनपता रहता है। अच्छे कर्मों के लिए वो आगे प्रेरित होता है।

    इच्छाओं को रखों सीमित और जायज

    पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इंसान को इच्छा करना कोई गलत बात नहीं। अगर इच्छा नहीं होगी तो जिंदगी नहीं होगी। पर इच्छाओं को मक्कड़जाल नहीं होना चाहिए। जैसे मकड़ी जाल बुनती है, इस तरह इच्छाओं का जाल मत बुनना। क्योंकि कहते हैं कि मकड़ी जब जाल बुन लेती है तो कई बार ऐसा भी होता है कि उसमें कोई जीव नहीं फंसता और वह खुद ही उसमें फंसकर सूख जाती है। उसी तरह इच्छाओं का मकड़ जाल इतना सख्त मत बुन लेना कि कहीं उसमें ही सारी जिंदगी गुजर जाए, तबाह हो जाओ। इच्छाएं रखो पर जायज।

    भूत प्रेतों के डरावने कार्यक्रमों से रहें दूर

    पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि नंबरों के चक्कर में टीवी पर सीरियलों पर ऐसे कार्यक्रम पेश किए जा रहे हैं जिनका समाज पर विपरीत असर पड़ रहा है। इन कार्यक्रमों को देखने वाले बच्चे बिस्तर में ही पेशाब कर देते हैं या रात को अकेले बाहर नहीं निकलते। आपजी ने फरमाया कि इन चैनलों पर भूत प्रेतों के कार्यक्रम की जगह वीर शूरवीरों, देशभक्तों के कार्यक्रम दिखाए जाए जिनकों देखकर बच्चे बहादुर बनेंगे और देश के काम आएंगे। पूज्य गुरूजी ने उपस्थित अभिभावकों से बच्चों को भूत प्रेतों के डरावने कार्यक्रमों से दूर रखने का आह्वान किया।

    ‘‘किसी ने हमें बोला था कि गुरू जी, आप कहते हो भूत-प्रेत नहीं होते। राजस्थान में भानगढ़ का किला है, आप वहां जाओ तो मान जाएं। और बाईचांस शूटिंग ही वहां हुई भानगढ़ के किले में। जिन सेवादारों ने वो लोकेशन देखी थी, हमें भी वो लोकेशन पसंद आ गई, फिर पता चला कि ये तो भानगढ़ का किला है। वहां हम रात को भी रहे। रातों को अकेले घूमते भी रहे। वहां बहुत-कुछ मिला, जैसे बंदर, लंगूर, चीते, पर भूत होता तो मिलता ना। क्योंकि भूत तो इस धरती पे होते ही नहीं। असल में होता यह है कि आपके दिमाग में आ गया कि भूत है। तो लंगूर ने छलांग मारी, पेड़ हिल गया, आपको लगता है कि भूत आ गया। तो यह सब साइको होता है, वैसे कोई चीज नहीं होती। तो ये भी हमने वहां के लोगों को बताया, बहुत लोग खुश हुए, बहुत लोगों ने नाम लिया।

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