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    अर्थव्यवस्था को संभालने की आवश्यकता

    Economy

    इकोनॉमी रेटिंग एजेंसी ‘मूडीज’ ने भारत की रेटिंग को घटा दिया है। एजेंसी ने भारत की रेटिंग ‘बीएए-2’ से घटाकर ‘बीएए-3’ कर दिया है। यह देश के लिए चिंताजनक बात है कि 19 जून 1998 के बाद मूडीज ने 22 साल बाद भारत की रेटिंग में गिरावट दिखाई है। इसमें कोई दोराय नहीं कि कोविड-19 महामारी के दौर में लॉकडाउन लगने के कारण देश की अर्थव्यवस्था को धक्का लगना तय था। केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था का पहिया चलाने के लिए 20 लाख करोड़ का पैकेज की घोषणा के साथ-साथ रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेटों में भी कटौती की। नए व्यवसायियों को लोन देना, कर्ज वसूली में राहत जैसे निर्णय भी इसी दिशा में लिए गए हैं, फिर भी विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के मद्देनजर चुनौतियों से इनकार नहीं किया जा सकता।

    Economy

    दरअसल देश की अर्थव्यवस्था में राजनीतिक और भ्रष्ट प्रशासनिक लोग सबसे बड़ा बाधक है, या तो राजनीतिक पहुंच रखने वाले व्यापारी सरकारी पैसे को चट्ट कर विदेशों में भाग जाते हैं या फिर ईमानदार व्यापारियों को राजनीतिक व प्रशासनिक लोगों की अनावश्यक दखल के कारण व्यापार बंद या रोकना पड़ता है। उद्योगपतियों को नेताओं दबाव व भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की आवश्यकता है ताकि वे बिना किसी भय के अपना व्यवसाय चला सकें। जहां तक लॉकडाउन का संबंध है, उद्योगों में मजदूरों का संतुलन बुरी तरह बिगड़ा हुआ है। लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक व सांस्कृतिक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन दिनों मजदूरों के पलायन के बाद उद्योगपति मजदूरों की कमी को लेकर परेशान है, क्योंकि उनके बिना फैक्ट्रियों व उद्योगों में उत्पादन चालू नहीं हो पा रहा और मार्केट में डिमांड भी धीमी पड़ गई है।

    दूसरी तरफ उद्योगपतियों व मजदूरों के बीच रिश्ते मानवीय मूल्यों पर आधारित न होकर पूंजीवादी मूल्यों तक सिमटकर रह गए हैं। खुद को पराया महसूस करते हुए मजदूरों ने अपने ग्रह राज्यों की तरफ रूख कर लिया है। अर्थव्यवस्था का संकट भी न केवल मांग, सप्लाई व और उत्पादन के साथ जुड़ा हुआ मामला है, बल्कि इसमें सामाजिक और मानवीय मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नि:संदेह सरकार ने कोरोना वायरस को पराजित करने के लिए मेडिकल प्रबंध में अवश्य सफलता प्राप्त की है परन्तु अर्थव्यवस्था में गिरावट भी पहाड़ जैसी चुनौती है जिससे निपटने के लिए सरकार को ठोस और वैज्ञानिक कदम उठाने की आवश्यकता है।

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