कोरोना नियमों में न किया जाए भेदभाव

Corona
देश में कोविड-19 महामारी का कहर लगातार जारी है। आम आदमी से पुलिस कर्मचारियों व बॉलीवुड तक इस महामारी का असर दिखाई दे रहा है। राजनीति में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान देश के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिनको कोविड-19 वायरस की पुष्टि हुई है। इससे पहले दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतिन्द्र जैन व पंजाब के पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्द्र सिंह बाजवा भी इस कोविड-19 वायरस से पीड़ित हुए हैं। अलग-अलग राज्यों के विधायक भी इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। वायरस के सामने कोई छोटा-बड़ा नहीं लेकिन यह नियमों की पालना में छोटे-बड़ों के साथ अलग-अलग व्यवहार करने की घटनाएं चिंताजनक हैं।
शासन-प्रशासन में अच्छे-बुरे के साथ भेदभाव होता है लेकिन हमारे राजनीति ढ़ांचे ने दोहरे मापदंडों के चलते कोरोना की बीमारी को भी नहीं छोड़ा। सत्ताधारी पार्टियों के नेता चाहे सार्वजनिक तौर पर कितना भी इक्ट्ठ करते रहें व सामाजिक दूरी की उल्लंघना भी होती रहे लेकिन फिर भी उनको पूछने वाला कोई नहीं होता लेकिन आम आदमी को तुरंत ही चालान के कागज थमा दिए जाते हैं। हैरानी तब होती है जब सामाजिक दूरी के निर्देश देने वाले स्वास्थ्य मंत्री ही लोगों के साथ मिलजुल कर खड़े होते हैं। दरअसल राजनेता अपनी सरगर्मियां जारी रखने के लिए भीड़ को एकत्रित करने से नहीं संकुचाते। विपक्षी पार्टियां भी इसी रफ्तार के साथ चल रही हैं। चाहे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह किसानों व अन्य संघर्षकारी संगठनों को धरने प्रदर्शन न करने की अपील करते हैं लेकिन खुद सत्तापक्ष के लोग भी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
पंजाब में स्थानीय निकायों के चुनाव नजदीक आ रहे हैं व पार्टियां धडाधड़ वर्कर्स के साथ नजदीकियां बनाने में जुटी हुई हैं। ऐसी परिस्थितियों में अगर सत्तापक्ष ही समाज के लिए नियमों के पालन का कोई अच्छा मॉडल पेश नहीं करे तब इससे दूसरों को भला क्या प्रेरणा मिलेगी? देश में मास्क न पहनने का जुर्माना 50-100 रूपये से लेकर 1 लाख रूपये तक है व पुलिस प्रतिदिन चालान काट रही है। इस वक्त यह बहुत आवश्यक हो गया है कि नियमों के मामले में राजनेताओं व आम लोगों के साथ सम्मान व्यवहार हो। इसमें ही देश का भला है। राजनीतिक हितों के लिए इक्ट्ठ कर नियमों को तोड़ना मंहगा साबित होगा, आखिर लोगों की जिंदगी का सवाल है। एक वायरस पीड़ित नेता सैकड़ों लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन सकता है, राजनीतिक पार्टियों के प्रमुखों को अपने निचले नेताओं को नियमों का पालन करने की नसीहत देनी चाहिए।

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