Ghazal

ज़िंदगी से मौत बोली ख़ाक़ हस्ती एक दिन

ज़िंदगी से मौत बोली ख़ाक़ हस्ती एक दिन जिस्म को रह जाएंगी रूहें तरसती एक दिन मौत ही इक चीज़ है कॉमन सभी इक दास्तो देखिये क्या सर बलन्दी और पस्ती एक दिन पास रहने के लिए कुछ तो बहाना चाहिए बस्ते-बस्ते ही बसेगी दिल की बस्ती एक दिन रोज़ बनता और बिगड़ता हुस्न है […]
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ग़जल : तीरो-तलवार से नहीं होता

तीरो-तलवार से नहीं होता काम हथियार से नहीं होता घाव भरता है धीरे-धीरे ही कुछ भी रफ्तार से नहीं होता खेल में भावना है ज़िंदा तो फ़र्क कुछ हार से नहीं होता सिर्फ़ नुक्सान होता है यारो लाभ तकरार से नहीं होता उसपे कल रोटियां लपेटे सब कुछ भी अख़बार से नहीं होता। -महावीर उत्तरांचली […]
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गजल : ग़रीबों को फ़क़त, उपदेश की घुट्टी पिलाते हो

गरीबों को फ़क़त, उपदेश की घुट्टी पिलाते हो बड़े आराम से तुम, चैन की बंसी बजाते हो है मुश्किल दौर, सूखी रोटियाँ भी दूर हैं हमसे मज़े से तुम कभी काजू, कभी किशमिश चबाते हो नज़र आती नहीं, मुफ़लिस की आँखों में तो ख़ुशहाली कहाँ तुम रात-दिन, झूठे उन्हें सपने दिखाते हो अँधेरा करके बैठे […]
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गजल : जो व्यवस्था भ्रष्ट हो, फ़ौरन बदलनी चाहिए

जो व्यवस्था भ्रष्ट हो, फ़ौरन बदलनी चाहिए लोकशाही की नई, सूरत निकलनी चाहिए मुफ़लिसों के हाल पर, आंसू बहाना व्यर्थ है क्रोध की ज्वाला से अब, सत्ता बदलनी चाहिए इंकलाबी दौर को, तेज़ाब दो जज़्बात का आग यह बदलाव की, हर वक्त जलनी चाहिए रोटियाँ ईमान की, खाएँ सभी अब दोस्तों दाल भ्रष्टाचार की हरगिज […]
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गजल : थरथरी-सी है आसमानों में

थरथरी-सी है आसमानों में, ज़ोर कुछ तो है नातवानों में। कितना खामोश है जहाँ, लेकिन, इक सदा आ रही है कानों में। हम उसी ज़िंदगी के दर पर हैं, मौत है जिसके पासबानों में। जिनकी तामीर इश्क़ करता है, कौन रहता है उन मकानों में। हमसे क्यों तू है बदगुमां ऐ दोस्त, हम नहीं तेरे […]
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