Hariyanvi

भरया रहवै भंडार

मरयादा कुल की रखै, जाण नहीं दे आण। तीन रूप नारी धरै, माँ, बेट्टी अर भाण।। बिजली पाणी मेह की, हर देखै बाट। अनदात्ता भूक्खा मरै, दुनिया करती ठाट।। जाड्डो-पालो-घाम-लू, बल्हद-खेत अर क्यार। बीज-दराती-हल-कस्सी, सब किसान का यार।। ज्यूं जवान सै सीम पै, खेत्तां रह्वै किसान। मिलकै राक्खैं देस की, आन-बान अर स्यान।। नसा करै […]
साहित्य