सच कहूँ स्पेशल: पैरालिसिस से कैसे बचा जाए, जानिये डॉ. गौरव इन्सां की जुबानी

Paralysis

सच कहूँ स्पेशल: देश में हर साल इस बीमारी की चपेट में हैं 15-16 लाख लोग

ब्रेन हेमरेज में खून की नली दिमाग के अंदर या बाहर फट जाती है। अगर बहुत तेज सिरदर्द के साथ उलटी और बेहोशी छाने लगे तो हेमरेज होने की आशंका ज्यादा होती है। ब्रेन हेमरेज से भी पैरालिसिस होता है। इसमें दिमाग के बाहर खून निकल जाता है और इसे हटाने के लिए सर्जरी करके क्लॉट को हटाया जाता है। अगर किसी भी रुकावट की वजह से दिमाग को खून की सप्लाई में कोई रुकावट आ जाए तो उसे स्ट्रोक कहते हैं। स्ट्रोक और हेमरेज, दोनों से ही पैरालिसिस हो सकता है।

पैरालिसिस: वक्त पर सही ईलाज जरूरी

  • मरीज की छोटी सी लापरवाही हो सकती है घातक : डॉ गौरव

पैरालिसिस को आमतौर पर लकवा, पक्षाघात, अधरंग, ब्रेन अटैक या ब्रेन स्ट्रोक के नाम से जाना जाता । हमारे देश में हर साल 15-16 लाख लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं। सही जानकारी न होने या समय पर इलाज न मिलने से इनमें से एक तिहाई लोगों की मौत हो जाती है, जबकि करीब एक तिहाई लोग अपंग हो जाते हैं। अपंगता की हालत में मरीज जीवन भर के लिए अपने परिवार वालों पर आश्रित हो जाता है।

लकवाग्रस्त करीब एक तिहाई लोग ही खुशकिस्मत होते हैं, जो वक्त पर सही इलाज मिलने से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। आज हैलो! डॉक्टर में ‘पैरालिसिस’ को लेकर सच कहूँ पाठकों के साथ अपने विचार सांझा कर रहे हैं शाह सतनाम जी स्पेशलिअी हॉस्टिपल के आर. एम. डॉ. गौरव इन्सां जो ये बताएंगे कि ‘पैरालिसिस’ क्या है और इसके लक्षणों को पहचानकर आप कैसे समय पर इस बीमारी से बच सकते हैं।

शरीर में इस तरह के दिखे बदलाव तो तुंरत चिकित्सक को दिखाएं

पैरालिसिस का अटैक पड़ने पर आमतौर पर शरीर का एक तरफ का हिस्सा काम करना बंद कर देता है। साथ ही उसी साइड की आंख और मुंह में भी टेढ़ापन आ जाता है। मनुष्य के दिमाग का दायां हिस्सा बाईं ओर के अंगों को कंट्रोल करता है और बायां हिस्सा दाईं ओर के अंगों को।

पैरालिसिस स्ट्रोक पड़ने पर अगर हमारे दिमाग के दाएं हिस्से में दिक्कत हुई है तो हमारे बाएं हाथ-पैर पर इसका असर पड़ेगा और अगर बाएं तरफ दिमाग में गड़बड़ी हुई है तो दायां हाथ-पैर काम करना बंद कर देगा। आमतौर पर रात को खाना खाने के बाद और सुबह के वक्त पैरालिसिस का अटैक ज्यादा होता है। बोलने में अचानक समस्या हो, शरीर के एक तरफ के हिस्से में भारीपन महसूस हो, चलने में दिक्कत हो, चीजें उठाने में परेशानी हो, एक आंख की रोशनी कम होने लगे, चाल बिगड़ जाए तो फौरन डॉक्टर के पास जाएं।

क्या हैं पैरालिसिस के कारण ?

हमारा दिमाग ही हमारे शरीर के सभी अंगों और कामकाज को नियंत्रित करता है। जब दिमाग की खून की नलियों में कोई खराबी आ जाती है तो ब्रेन स्ट्रोक होता है, जो पैरालिसिस की वजह बनता है। शरीर के दूसरे हिस्सों की तरह ही दिमाग में भी दो तरह की खून की नलियां होती हैं। एक जो दिल से दिमाग तक खून लाती हैं यानी धमनी, और दूसरी जो दिमाग से वापस दिल तक खून लौटाती हैं यानी शिरा। यूं तो पैरालिसिस धमनी या शिरा दोनों में से किसी की भी खराबी से हो सकता है, लेकिन ज्यादातर लोगों में यह समस्या धमनी में खराबी के कारण होती है।

कैसे खतरा कम करें

  • हार्ट की बीमारी है तो उसकी उचित जांच और इलाज कराएं।
  • 20-25 साल की उम्र से ही नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराएं।
  • डॉक्टर की सलाह पर खाने में परहेज करें और एक्सरसाइज बढ़ाएं।
  • अगर आपका ब्लड प्रेशर 120/80 है तो अच्छा है। ज्यादा है तो 135/85 से कम लाना लक्ष्य होना चाहिए।
  • 40 साल के बाद साल में एक बार शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूरी है।
  • वजन कंट्रोल में रखें, कोई बीमारी न हो तो भी 40 की उम्र के बाद ज्यादा नमक और फैट वाली चीजें कम खाएं।
  • तनाव और गुस्से से दूर रहें, मन को हमेशा शान्त रखें।

लकवे के कारण

  • हाई ब्लड पे्रशर
  • डायबिटीज
  • स्मोकिंग
  • दिल की बीमारी
  • मोटापा
  • बुढ़ापा

लकवा के मरीज क्या खाएं

  • अनाज: गेहूं, जौ, बाजरा
  • मूंग दाल, कुलथ अंगूर, हल्दी, सेब, पपीता, संतरा, चेरी, तरबूज
  • तेल, बादाम, अदरक, लहसुन, अलसी के बीज
  • फल एवं सब्जियां: हरी सब्जियां (पालक, सहजन), पत्ता गोभी, ब्रोकोली, अनार, फालसा],
  • अन्य: हींग, अजवाइन, सिरका, तिल, घी, तैल, दूध, नारियल पानी, ग्रीन टी, जैतून का

मिथ और फैक्ट

मिथ: पैरालिसिस का कोई इलाज नहीं।
फैक्ट: पैरालिसिस का इलाज मुमकिन है, बशर्ते जल्द से जल्द सही इलाज मिल जाए।
मिथ: पैरालिसिस अपने आप ठीक हो जाता है।
फैक्ट: अक्सर ऐसा नहीं होता है, अगर होता भी है तो आगे ज्यादा घातक पैरालिसिस अटैक न पड़े इसके लिए जांच और इलाज जरूरी है।
मिथ: कबूतर खाने या उसका शोरबा पीने से यह ठीक हो जाता है।
फैक्ट: ऐसी कोई बात नहीं है, मेडिकल हिस्ट्री में ऐसा कोई सबूत नहीं है।

तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

 

डॉ. गौरव इन्सां बताते हैं कि ऐसी परिस्थिति में सबसे ज्यादा जरूरी और पहले जो काम है वो है तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना। इस मामले में मरीज की छोटी सी भी लापरवाही घातक सिद्ध हो सकती है। इसलिए लक्ष्ण दिखने पर तुंरत डॉक्टर से संपर्क करें।
-डॉ. गौरव इन्सां

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