जस्टिस एन.वी. रमण देश के अगले मुख्य न्यायाधीश नियुक्त

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N. V. Ramana

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. रमण (नूतलपाटि वेंकटरमण) को देश का अगला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) नियुक्त कर दिया। इससे पूर्व 23 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर न्यायमूर्ति रमण के नाम की सिफारिश की थी। जस्टिस रमण 24 अप्रैल को देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

किसान परिवार में हुआ जन्म

आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पुन्नावरम गांव में किसानों के एक विनम्र परिवार में एन.वी. रमण का जन्म हुआ। वे एक छात्र नेता बनकर एक शैक्षणिक वर्ष का त्याग करते हुए 1975 में राष्ट्रव्यापी आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रता के लिए लड़े। एक समय ऐसा भी था जब न्यायमूर्ति रमण को उनके पिता ने जून 1975 में आपातकाल के खिलाफ एक सार्वजनिक बैठक की अध्यक्षता करने के बाद शहर छोड़ने के लिए कह दिया था। जस्टिस रमण ने जनवरी में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, ‘मैंने देखा कि इतने सारे युवाओं ने मानवाधिकारों के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया था। ऐसे में मुझे कॉलेज के एक साल खोने का कोई पछतावा नहीं है। हालांकि, मेरे पिता को यकीन था कि मुझे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।’

ऐसा रहा सफर

1980 में एक लॉ कॉलेज में दाखिला लेने से पहले, न्यायमूर्ति एन.वी. रमण ने दो साल तक एक क्षेत्रीय समाचार पत्र के लिए एक पत्रकार के रूप में काम किया। न्यायमूर्ति रमन ने विज्ञान एवं कानून में स्नातक करने के बाद 10 फरवरी 1983 से वकालत पेशे की शुरूआत की। अपने वकालत पेशे के दौरान उन्होंने न केवल आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय बल्कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) तथा उच्चतम न्यायालय में भी प्रैक्टिस की।

27 जून 2000 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त होने के बाद वह 13 मार्च से 20 मई 2013 तक उसी उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए। बाद में उन्हें पदोन्नति देकर 2 सितम्बर 2013 को दिल्ली उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 17 फरवरी 2014 को वह शीर्ष अदालत में पदोन्नत किए गए। न्यायमूर्ति रमन 26 अगस्त 2022 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। शीर्ष अदालत में सीजेआई समेत न्यायाधीशों की अनुमोदति संख्या 34 है। वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में 29 न्यायाधीश हैं।

अहम फैसले

जस्टिस एनवी रमण ने उस बेंच का नेतृत्व किया, जिसने पिछले साल जनवरी में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में दूरसंचार ब्लैकआउट पर कहा था कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना मौलिक अधिकार है। पीठ ने तब जम्मू-कश्मीर प्रशासन को आदेश दिया कि वह दूरसंचार और इंटरनेट सेवाओं पर अंकुश लगाने से संबंधित सभी आदेशों की समीक्षा करे और उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र में रखे। कश्मीर प्रतिबंधों पर याचिकाओं के एक समूह को मानते हुए न्यायमूर्ति रमना की पीठ ने प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व को भी रेखांकित किया था। पीठ की तरफ से कहा गया कि जिम्मेदार सरकारों को हर समय प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।

न्यायमूर्ति रमण ने कर्नाटक विधानसभा मामले में एक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। उन्होंने विधायकों को अयोग्य ठहराने के स्पीकर के फैसले को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस्तीफा देने से स्पीकर के अधिकार खत्म नहीं हो जाते हैं। हालांकि, अयोग्यता के मामले में विधायकों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। कोर्ट ने अयोग्य विधायकों को राहत देते हुए उनको विधानसभा उपचुनाव लड़ने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि विधायकों को विधानसभा के पूरे कार्यकाल के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

 

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