गेहूं में पीला रतुआ के लिए अनुकूल मौसम, किसान बरतें सावधानी

कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों के लिए जारी की सलाह

हनुमानगढ़। (सच कहूँ न्यूज) कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के वैज्ञानिकों ने वर्तमान मौसम को गेहूं में पीला रतुआ के लिए अनुकूल बताते हुए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम ईकाई कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के अनुसार हनुमानगढ़ जिले में 17 से 22 जनवरी के दौरान अधिकतम औसत तापमान 18.0 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 6.0 डिग्री सेल्सियस रहा। सप्ताह के दौरान आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ 20 जनवरी को हल्की बारिश दर्ज की गई।

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कुछ दिनों से क्षेत्र में बादल छाए रहने और हवा में नमी की स्थिति पीला रतुआ के लिए अनुकूल है। जब अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान क्रमश: 16 से 20 डिग्री सेल्सियस और 3 से 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना होती है, तो ऐसे मौसम की स्थिति कवक रोग के लिए अत्यधिक अनुकूल होती है। कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के कीट वैज्ञानिक डॉ. उमेश कुमार ने किसानों से कहा है कि वे अपने खेतों में पीले रतुआ की नियमित निगरानी करें, जो ऐसे मौसम में फसलों को प्रभावित करने वाला एक कवक रोग है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस बीमारी पर ध्यान दिया जाए तो इस पर काबू पाया जा सकता है। इसके लिए खेतों की नियमित जांच जरूरी है।

उन्होंने कहा कि गेहूं की किस्में जो लंबे समय तक नहीं बदली जाती हैं, वे भी बीमारी के लिए अतिसंवेदनशील होती हैं। गेहूं की फसल में पीला रतुआ (येलो रस्ट) रोग के आने की संभावना है। पत्तों पर छोटे, चमकदार पीले, गोल धब्बे बनते हैं। इन पत्तियों को छूने पर पीला पाउडर हाथ पर लगना इसका मुख्य लक्षण है। रोग प्रभावित खेत में जाने पर कपड़े पीले हो जाते हैं। यह रोग खेत में प्रारंभ में 10-15 पौधों गोल दायरे में प्रारंभ होकर पूरे खेत में फैल सकता है। इसके प्रबंधन के लिए किसान लगातार खेत का निरीक्षण करते रहें। रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रोपीकोनाजोल 25 ईसी या टेब्यूकोनाजोल 25 ईसी का 1 मिली प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें। रोग के प्रकोप एवं फैलाव को देखते हुए दूसरा छिड़काव 10-15 दिन के अंतर पर करें।

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