Literature
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Story: जब बापू ने मेरी बीएड के लिए अपनी ट्रॉली बेच दी
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By Sach Kahoon Desk
Story: मनुष्य इस संसार में आता है और एक दिन चला भी जाता है। यहां कोई भी सदा के लिए ठहरने नहीं आया। जो जन्म लेता है, उसका अंत निश्चित है; परंतु जीवन की धारा स्मृतियों के सहारे ही आगे बढ़ती रहती है। जैसे माँ का जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है, वैसे ही […]
Literature: मीठा रिश्ता बुआ का
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By Sach Kahoon Desk
Bua: बुआ के साथ रिश्ता बड़ा प्यारा और मीठा होता है। मुझे नहीं पता कि बुआ शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है। हाँ, जो फूं-फूं करता है, उसे फुफ्फड़ कहते हैं, और उसी से “फुफ्फी” शब्द बना है। भुआ को सास “फुफेस” कहती है। भुआ उसी घर में जन्मी होती है, जहां वह अपने भाइयों […]
Literature: दस रुपये की जिंदगी
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By Sach Kahoon Desk
जीवन चलने का नाम Literature: कई साल पहले मैं दिल्ली के एक व्यस्त मेट्रो स्टेशन पर खड़ा था, अपने नए रिज्यूमे को अंतिम रूप देने में व्यस्त। तभी एक छोटी-सी घटना ने मेरे जीवन का नजरिया बदल दिया। एक 8-9 साल की बच्ची, मैले-कुचैले कपड़ों में, मेरे पास आकर खड़ी हो गई। उसने बिना कुछ […]
Literature: डर लगता है कि कहीं कोई प्याज की सब्जी को नजर न लगा दे….
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By Sach Kahoon Desk
Literature: हमारे गांव में मेरे पड़ोस में एक औरत रहती थी जिसका नाम निक्की था। हम उसे चाची निक्की कहते थे। असल में मेरे मम्मी-पापा उसे चाची कहते थे, और उनकी देखादेखी हम भी उसे चाची ही कहने लगे थे। उसके तीन बेटे थे, जिनमें सबसे छोटा कोई पांच साल का था। चाची लोगों का […]
Literature : मोतीलाल का किशोर बेटा जब घर से निकल गया तो…!
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By Sach Kahoon Desk
पीलीबंगा, हनुमानगढ़ (निशांत)। मोतीलाल का किशोर बेटा जब घर से निकल गया तो मोतीलाल की पत्नी निर्मला को इतना शोक लगा कि वह बुक्का फाड़कर और माथा पीट-पीटकर रोने लगी। अड़ोसी-पड़ोसी दौड़े आए और धीरज बंधाने लगे- कोई बानही, बबलू घर से ही तो गया है दो चार दिन में लौट आएगा। Literature हाय रे! […]
बंद मुट्ठियों की दास्तां
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By Sach Kahoon Desk
हम छुट्टी वाले दिन बाहर घूमने चले जाते। उस लड़के के साथ अनेक जगहों हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गोवा आदि राज्यों के शहरों में भ्रमण किए। …गतांक से आगे जज यह सब कुछ सुन कर आश्चर्य में पड़ गए तथा उन्होंने बहुत सोच विचार के पश्चात कहा, ‘‘बेटी सुनो, तस्कर (स्मगलर) लोग किसी के भी सगे […]
साहित्य: अमरलोक
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By Sach Kahoon Desk
एक दिन एक नौजवान बोला, ‘‘मुझे यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगती कि हर किसी को एक न एक दिन मरना ही पड़ता है। मैं ऐसी जगह की खोज करूँगा जहाँ कोई कभी नहीं मरता।’’ वह अपने माता-पिता, सगे-संबंधियों सबसे विदा लेकर चल पड़ा अमरलोक की खोज में! वह हर मिलने वाले से अमरलोक की […]
कविता: मैं किसान हूँ…
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By Sach Kahoon Desk
हा मैं किसान हूँ जमीं को चीर कर अन्न उगाने वाला। खुद की पेट काट कर भी सबकी भूख मिटाने वाला। सरकार की बीमार मानसिकता का शिकार हो कर भी पेट भरने वाला आय दोगुनी का लॉलीपॉप दे कर । एक्ट ला हमें खत्म करने वाली सरकार के खिलाफ है हम न हम हिंदुस्तान के […]
दर्जी की सीख
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By Sach Kahoon Desk
एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया। वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा। उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा […]
प्रेरक प्रसंग: ईमानदारी का फल
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By Sach Kahoon Desk
बहुत पहले की बात है एक राजा सुबह सुबह सैर करने के लिये महल से अकेला ही निकला। रास्ते में उसने देखा, एक किसान पसीने में तर-ब-तर अपने खेत में काम कर रहा है। राजा ने उसके पास जाकर पूछा, ‘भाई आप इतनी मेहनत करते हो, दिन में कितना कमा लेते हो ?’ किसान ने […]
India is my country: भारत देश मेरा…
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By Sach Kahoon Desk
मेरी भारत माता मानवता की महान भूमि है पहली बार सभ्यता को अपनी उपस्थिति मिली
अलग-अलग देशों में अभिवादन की अनोखी परंपरा
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By Sach Kahoon Desk
सच कहूँ डेस्क। अपने प्रियजनों या दोस्तों से मुलाकात होने पर, अजनबियों से मिलने पर, किसी व्यापारिक या व्यावसायिक समारोहों के दौरान लोग अक्सर एक दूसरे से हाथ मिलाकर (हैंडशेकिंग) अभिवादन करते हैं। यह स्वाभाविक रूप से पश्चिमी देशों की प्रथा रही है, और विश्व स्तर पर भी अभिवादन करने की व्यापक और संक्षिप्त परंपरा […]