उच्च शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, दीप्ति गौड़ मुखर्जी बनीं नई सचिव; NTA और परीक्षा व्यवस्था पर होगी बड़ी जिम्मेदारी
उच्च शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, दीप्ति गौड़ मुखर्जी बनीं नई सचिव; NTA और परीक्षा व्यवस्था पर होगी बड़ी जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से सोमवार देर रात जारी आदेश में पहले जारी नियुक्ति आदेश में आंशिक बदलाव किया गया। अब दीप्ति गौड़ मुखर्जी उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगी।
दीप्ति गौड़ मुखर्जी ऐसे समय में इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त हुई हैं, जब देश की उच्च शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था लगातार चर्चा में है। खास तौर पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और प्रवेश परीक्षाओं को लेकर पिछले कुछ समय में कई सवाल उठे हैं।
नरेश पाल गंगवार की जगह संभालेंगी जिम्मेदारी
दीप्ति गौड़ मुखर्जी अब नरेश पाल गंगवार की जगह उच्च शिक्षा सचिव का पद संभालेंगी। गंगवार को करीब तीन सप्ताह पहले ही इस पद पर नियुक्त किया गया था। नरेश पाल गंगवार 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। इससे पहले वह पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
उनकी उच्च शिक्षा सचिव के पद पर नियुक्ति के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया चर्चाओं में उनके परिवार से जुड़ी एक सरकारी सब्सिडी का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा सचिव की नियुक्ति में बदलाव किया और अब दीप्ति गौड़ मुखर्जी को यह जिम्मेदारी दी गई है।
कौन हैं दीप्ति गौड़ मुखर्जी?
दीप्ति गौड़ मुखर्जी 1993 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और मध्य प्रदेश कैडर से आती हैं। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अर्थशास्त्र में मास्टर्स की पढ़ाई की है। उच्च शिक्षा विभाग में नियुक्ति से पहले वह कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की सचिव के पद पर कार्यरत थीं। प्रशासनिक क्षेत्र में लंबे अनुभव के चलते उन्हें अब केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उच्च शिक्षा विभाग में कई अहम जिम्मेदारियां
उच्च शिक्षा विभाग देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों की देखरेख करता है। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षा संस्थानों और उच्च शिक्षा से संबंधित नीतिगत मामलों के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन से जुड़े काम भी आते हैं।
ऐसे में दीप्ति गौड़ मुखर्जी के सामने उच्च शिक्षा क्षेत्र को लेकर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों से जुड़े नीतिगत फैसलों के साथ शिक्षा व्यवस्था में सुधार भी उनके प्रमुख कार्यों में शामिल रहेगा।
NTA और परीक्षा व्यवस्था भी होगी बड़ी चुनौती
दीप्ति गौड़ मुखर्जी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब देश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। खास तौर पर NEET-UG समेत कई परीक्षाओं के आयोजन और प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।
NTA देश की कई प्रमुख प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित करती है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, पेपर लीक की शिकायतों, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और अभ्यर्थियों की समस्याओं को लेकर सरकार पर सुधार के लिए दबाव रहा है।
इन विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार की ओर से उच्च स्तरीय समितियों और टास्क फोर्स के गठन जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
नई सचिव के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां
उच्च शिक्षा सचिव के तौर पर दीप्ति गौड़ मुखर्जी के सामने एक तरफ राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने, विश्वविद्यालयों और तकनीकी शिक्षा संस्थानों में सुधार करने की जिम्मेदारी होगी, वहीं दूसरी तरफ देश की परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर भी ध्यान देना होगा। NTA की कार्यप्रणाली में सुधार, परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और विद्यार्थियों का भरोसा कायम करना भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे। कुल मिलाकर, उच्च शिक्षा विभाग में हुआ यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब सरकार के सामने उच्च शिक्षा और परीक्षा प्रणाली दोनों को लेकर कई अहम चुनौतियां हैं। अब देखना होगा कि दीप्ति गौड़ मुखर्जी के कार्यकाल में इन क्षेत्रों में क्या बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।