E-20 Petrol: पंजाब विस ने ई-20 पेट्रोल के अनिवार्य इस्तेमाल पर रोक लगाने की केन्द्र सरकार से की मांग
पंजाब विधानसभा ने उठाए E-20 पेट्रोल पर सवाल, वैज्ञानिक अध्ययन सार्वजनिक करने की मांग
चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। Chandigarh News: पंजाब विधानसभा ने मंगलवार को ई-20 पेट्रोल के देशभर में अनिवार्य इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से इसे तत्काल स्थगित करने और व्यापक समीक्षा करने का आग्रह किया। विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि जब तक वाहन अनुकूलता, उपभोक्ता सुरक्षा और राज्यों से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक ई-20 पेट्रोल को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और पर्यावरण अनुकूल र्इंधन को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य हैं, लेकिन ऐसी नीतियों को वैज्ञानिक आधार, पारदर्शिता और राज्यों एवं आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर लागू किया जाना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया कि देश, विशेषकर पंजाब में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं, जो ई-20 र्इंधन के अनुरुप डिजाइन या प्रमाणित नहीं हैं। ऐसे वाहनों में ई-20 के अनिवार्य उपयोग से इंजन की कार्यक्षमता, र्इंधन प्रणाली के पुर्जों की आयु, माइलेज, रखरखाव खर्च, वारंटी विवाद और वाहनों के पुनर्विक्रय मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
विधानसभा ने कहा कि इस नीति का आर्थिक बोझ सबसे अधिक मध्यम वर्ग, किसानों, परिवहन कारोबारियों, छोटे व्यापारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ सकता है। सदन ने यह भी कहा कि ई-20 लागू करने का लक्ष्य वर्ष 2030 से घटाकर पहले कर दिया गया, जिससे वाहन निमार्ताओं, किसानों और आम लोगों को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिल सका। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मांग की गयी कि उपभोक्ताओं को एथेनॉल मुक्त पेट्रोल और ई-20 पेट्रोल के बीच अपनी पसंद का विकल्प दिया जाए।
साथ ही ई-20 पेट्रोल की अपेक्षाकृत कम ऊर्जा क्षमता और माइलेज को ध्यान में रखते हुए इसकी खुदरा कीमत में भी उचित संशोधन किया जाए। विधानसभा ने आॅटोमोबाइल इंजीनियरों, पेट्रोलियम विशेषज्ञों, पर्यावरण वैज्ञानिकों, उपभोक्ता संगठनों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की एक स्वतंत्र समिति गठित करने की भी सिफारिश की, जो ई-20 के तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार ई-20 से संबंधित सभी वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक अध्ययन सार्वजनिक करे तथा यदि अनिवार्य उपयोग के कारण किसी उपभोक्ता को वाहन संबंधी नुकसान या आर्थिक हानि होती है तो उसके लिए उचित मुआवजा व्यवस्था लागू की जाए।