अमेरिका की सीनेट में पहली बार पहुंचे मुस्लिम नेता अब्दुल अल सैयद, ट्रंप समर्थित उम्मीदवार को हराकर रचा इतिहास; भारत से भी है खास कनेक्शन

अमेरिका की सीनेट में पहली बार पहुंचे मुस्लिम नेता अब्दुल अल सैयद, ट्रंप समर्थित उम्मीदवार को हराकर रचा इतिहास; भारत से भी है खास कनेक्शन

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वॉशिंगटन: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव 2026 में मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद ने जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर अमेरिकी सीनेट में अपनी जगह बनाई है। माइक रोजर्स को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त था। इस जीत के साथ अब्दुल अल सैयद अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम अमेरिकी बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि की चर्चा भारत में भी हो रही है, क्योंकि उनकी पत्नी का परिवार कर्नाटक से ताल्लुक रखता है।

कौन हैं अब्दुल अल सैयद?

अब्दुल रहमान मोहम्मद अल सैयद को अब्दुल अल सैयद के नाम से जाना जाता है। उनका जन्म और पालन-पोषण अमेरिका के मिशिगन राज्य के मेट्रो डेट्रॉइट इलाके में हुआ था। उनके पिता मिस्र से अमेरिका आकर बस गए थे। अब्दुल पेशे से डॉक्टर और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं। उन्होंने अपने करियर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और आम लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए काम किया है। राजनीति में आने से पहले वह शिक्षा और स्वास्थ्य प्रशासन से भी जुड़े रहे।

मेडिकल की पढ़ाई से लेकर राजनीति तक का सफर

अब्दुल अल सैयद ने यूनिवर्सिटी आॅफ मिशिगन से बायोलॉजी और राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित रोड्स स्कॉलरशिप हासिल की और आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। साल 2014 में उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी के कॉलेज आॅफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेलमैन स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ में महामारी विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम किया। उनका शोध स्वास्थ्य सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच और स्वास्थ्य क्षेत्र में मौजूद असमानताओं पर केंद्रित रहा।

2015 में संभाली थी स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी

अब्दुल अल सैयद ने साल 2015 में डेट्रॉइट के स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी निदेशक की जिम्मेदारी संभाली थी। इस पद पर नियुक्त होने के समय वह अमेरिका के किसी बड़े शहर के सबसे कम उम्र के स्वास्थ्य अधिकारियों में शामिल थे। इसके बाद उन्होंने वेन काउंटी के स्वास्थ्य, मानव और वेटरन्स सेवाओं से जुड़े विभाग में भी निदेशक के रूप में काम किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने और आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया।

पत्नी का भारत के कर्नाटक से है संबंध

अब्दुल अल सैयद का भारत से सीधा पारिवारिक संबंध नहीं है, लेकिन उनकी पत्नी सारा जुकाकू का परिवार भारत के कर्नाटक राज्य से जुड़ा हुआ है। सारा पेशे से मनोचिकित्सक हैं। दोनों की मुलाकात मिशिगन में पढ़ाई के दौरान हुई थी। सारा के परिवार की जड़ें कर्नाटक के भटकल इलाके में हैं, जो मंगलुरु के पास स्थित है। उनके दादा शमसुद्दीन जुकाकू का संबंध भी इसी क्षेत्र से बताया जाता है। अब्दुल और सारा की दो बेटियां हैं। उनकी पत्नी का भारतीय पारिवारिक कनेक्शन होने के कारण अब्दुल की चुनावी जीत भारत में भी चर्चा का विषय बन गई है।

ट्रंप ने लगाए थे वामपंथी और जिहादी होने के आरोप

चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब्दुल अल सैयद पर निशाना साधा था। ट्रंप ने उनके नाम और राजनीतिक विचारधारा को लेकर टिप्पणियां की थीं। उन्हें वामपंथी और जिहादी कहकर भी संबोधित किया गया था। इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल ने कहा था कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि ट्रंप उनका नाम किस तरह लेते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा था कि नवंबर के बाद ट्रंप को उन्हें सीनेटर कहकर बुलाना पड़ेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं और आम लोगों के मुद्दों पर रहा जोर

अब्दुल अल सैयद ने अपने चुनाव प्रचार में स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाने, आर्थिक असमानता कम करने और कामकाजी परिवारों को राहत देने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की वकालत की। उनके चुनावी अभियान में सामाजिक सुरक्षा और कामकाजी महिलाओं पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने जैसे मुद्दे भी शामिल रहे।

अमेरिकी राजनीति में बनाया नया इतिहास

मिशिगन से जीत हासिल करने के बाद अब्दुल अल सैयद की पहचान अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण नाम के रूप में उभरी है। उनकी जीत को मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से ऐतिहासिक बताया जा रहा है। मिस्र मूल के परिवार में जन्मे अब्दुल का मेडिकल और सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र से होते हुए अमेरिकी सीनेट तक पहुंचने का सफर काफी चर्चा में है। वहीं, उनकी पत्नी का कर्नाटक से जुड़ाव इस उपलब्धि को भारतीय पाठकों के लिए भी खास बनाता है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सीनेटर के रूप में वह अपने चुनावी वादों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

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