5 जी क्यों बना एरोप्लेन की राह में रोड़ा, आईये जानते हैं इससे कैसे है खतरा?

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नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। एयर इंडिया समेत कई अंतरराष्ट्रीय विमान कंपनियों ने 5जी मोबाइल फोन सेवा और जटिल विमानन प्रौद्योगिकियों के बीच हस्तक्षेप पर अनिश्चितता को लेकर बुधवार से अमेरिका के लिए उड़ानों में कटौती कर दी है। वहीं अमेरिका के प्रमुख पैसेंजर और कार्गो एयरलाइन के चीफ एक्जीक्यूटिव ने 5 जी से जुड़े नए खतरे की चेतावनी दी है।

कारण नंबर 1: 5 जी टेक्नोलॉजी अल्टीमीटर जैसे एविएशन इंस्टूमेंट्स में इंटरफेयर कर सकती है, जिसका इस्तेमाल जमीन से एरोप्लेन की ऊंचाई मापने के लिए किया जाता है।

कारण नंबर 2: अल्टीमीटर 4.2 से 4.4 जीएचजैड की रेंज में काम करते हैं और यही एविएशन सेक्टर की चिंता की वजह है। चूंकि, नए 5 जी स्पेक्टर्म की फ्रीक्वेंसी इन इंस्टूमेंट्स की रेंज के बहुत करीब है, इसलिए इनके काम करने में दिक्कत हो सकती है।

कारण नंबर 3: जितनी ज्यादा फ्रीक्वेंसी का स्पेक्ट्म होगा, उतनी ही ज्यादा स्पीड मिलेगी। इसलिए आॅपरेटर्स 5 जी वैल्यू के लिए हाईफ्रीक्वेंसी पर आॅपरेट करेंगे, जिसकी वजह से परेशानी होगी। कुछ सी-बैंड स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल सैटेलाइट रेडियो के लिए किया जाता था, लेकिन 5 जी के कारण टैÑफिक ज्यादा होगा।

साउथ कोरिया में अभी तक कोई दिक्कत नहीं

आपको बता दें कि साउथ कोरिया में भी 5 जी नेटवर्क की फ्रीक्वेंसी 3.42 से 3.7 जीएचजैड तक सीमित है। यहां 2019 से 5 जी नेटवर्क काम कर रहा है और अब तक कोई दिक्कत सामने नहीं आई है। वैरीजॉन का कहना है कि वह कई सालों तक हायर बैंड के नजदीक के स्पेक्ट्रम इस्तेमाल नहीं करेंगे।

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