World Stroke Day 2026: क्या घंटों मोबाइल और लैपटॉप चलाने से बढ़ता है ब्रेन स्ट्रोक का खतरा? जानें बचाव के तरीके
World Stroke Day 2026: क्या घंटों मोबाइल और लैपटॉप चलाने से बढ़ता है ब्रेन स्ट्रोक का खतरा? जानें बचाव के तरीके
हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को ब्रेन स्ट्रोक के प्रति जागरूक करना और इसके जोखिमों, लक्षणों व बचाव के उपायों की जानकारी देना है। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन, लैपटॉप और कंप्यूटर हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सुबह उठते ही फोन देखना, घंटों कंप्यूटर पर काम करना और रात को सोने से पहले सोशल मीडिया चलाना हमारी दिनचर्या में शामिल हो गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लंबे समय तक स्क्रीन देखने से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्क्रीन के सामने समय बिताना अपने आप में स्ट्रोक का सीधा कारण साबित नहीं हुआ है। हालांकि, स्क्रीन के कारण शारीरिक गतिविधियां कम होना और घंटों एक ही जगह बैठे रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाली कई स्वास्थ्य समस्याएं विकसित हो सकती हैं।
स्क्रीन टाइम से ज्यादा जरूरी है शारीरिक सक्रियता
दिल्ली स्थित सीके बिरला अस्पताल के न्यूरोसाइंस विभाग के निदेशक डॉ. के.के. जिंदल के अनुसार, स्क्रीन टाइम और स्ट्रोक के बीच सीधे संबंध को लेकर सावधानी से समझना जरूरी है। दरअसल, लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करने के दौरान व्यक्ति अक्सर शारीरिक गतिविधियों से दूर रहता है। इससे वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और खराब कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ये सभी ब्रेन स्ट्रोक के महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
स्ट्रोक की स्थिति तब पैदा होती है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क की रक्त वाहिका से खून निकलने लगता है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। इसलिए स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है।
घंटों बैठे रहने से बढ़ सकता है स्ट्रोक का जोखिम
अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन की पत्रिका Stroke में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि 60 वर्ष या उससे कम उम्र के ऐसे वयस्क, जो दिन में कम से कम आठ घंटे बैठकर मनोरंजक गतिविधियों में बिताते थे और जिनकी शारीरिक गतिविधि कम थी, उनमें अधिक सक्रिय लोगों की तुलना में स्ट्रोक का खतरा ज्यादा था।
हालांकि, इस शोध से यह साबित नहीं होता कि स्क्रीन देखना सीधे स्ट्रोक का कारण है। इसके बजाय, यह लंबे समय तक निष्क्रिय रहने और स्ट्रोक के जोखिम के बीच संबंध को दर्शाता है। इसलिए स्क्रीन के सामने बिताए गए समय के साथ-साथ यह देखना भी जरूरी है कि व्यक्ति दिनभर कितना सक्रिय रहता है।
क्या ज्यादा स्क्रीन टाइम की कोई तय सीमा है?
सिर्फ स्क्रीन पर बिताए गए घंटों के आधार पर किसी व्यक्ति के स्ट्रोक का खतरा निर्धारित नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने वाला व्यक्ति यदि नियमित व्यायाम करता है और अपनी सेहत का ध्यान रखता है, तो उसकी स्थिति उस व्यक्ति से अलग हो सकती है जो दिनभर बैठा रहता है और शारीरिक गतिविधि नहीं करता।
इसके अलावा, देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप चलाने से नींद प्रभावित हो सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने से ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, ऐसी कोई निश्चित स्क्रीन टाइम सीमा नहीं है, जिसके पार जाते ही स्ट्रोक का खतरा बढ़ना तय हो जाए।
इन लोगों को रहना चाहिए ज्यादा सतर्क
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापे या हृदय रोग से जूझ रहे लोगों को स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जिन लोगों को पहले स्ट्रोक या ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) हो चुका है, उन्हें भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच और उपचार जारी रखना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों में से एक है। इसलिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाना, निर्धारित दवाएं लेना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है।
युवाओं को भी नहीं करना चाहिए लापरवाही
अक्सर माना जाता है कि ब्रेन स्ट्रोक केवल बुजुर्गों को होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता जरूर है, मगर युवाओं को भी स्ट्रोक हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, हृदय संबंधी समस्याएं और अन्य जोखिम कारक कम उम्र में भी स्ट्रोक की आशंका बढ़ा सकते हैं। इसलिए युवाओं को भी अपनी सेहत और दिनचर्या को लेकर सजग रहना चाहिए।
मोबाइल और लैपटॉप चलाते समय अपनाएं ये आदतें
स्क्रीन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। खासकर उन लोगों के लिए, जिनका काम मोबाइल या कंप्यूटर पर निर्भर है। जरूरी यह है कि लगातार कई घंटे तक एक ही जगह बैठने से बचा जाए।
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काम के बीच नियमित अंतराल पर उठकर कुछ देर टहलें।
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लंबे समय तक बैठने के बजाय दिनभर शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं।
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रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करें।
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वयस्क हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखें।
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संतुलित आहार लें और वजन नियंत्रित रखें।
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धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं।
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पर्याप्त नींद लें और ब्लड प्रेशर, शुगर व कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करवाएं।
सिर्फ स्क्रीन टाइम घटाना काफी नहीं
ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के लिए केवल मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करना पर्याप्त नहीं है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखना, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल का उचित उपचार करवाना तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। स्क्रीन टाइम को संतुलित करने के साथ-साथ इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण पहचानें, तुरंत लें मदद
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को समय रहते पहचानना जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसके प्रमुख संकेत हैं:
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चेहरे का अचानक एक तरफ झुक जाना।
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हाथ या पैर में अचानक कमजोरी अथवा सुन्नपन, खासकर शरीर के एक तरफ।
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बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी।
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अचानक दिखाई देने या चलने में दिक्कत।
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संतुलन बिगड़ना या बिना स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना।
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। लक्षण कुछ मिनट बाद ठीक हो जाएं, तब भी अनदेखी न करें।
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