Race Course Mosque Latest News: रेस कोर्स मस्जिद मामले में बड़ा अपडेट!
बिजली-पानी की आपूर्ति और परिसर में प्रवेश को लेकर विवाद
नई दिल्ली (एजेंसी)। राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित रेस कोर्स मस्जिद को लेकर विवाद सामने आया है। मस्जिद की बिजली-पानी की सुविधाओं और परिसर में प्रवेश से जुड़ी पाबंदियों को लेकर संबंधित पक्षों ने चिंता जताई है। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अधिकारियों से मस्जिद की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यक सुविधाएं बहाल करने की मांग की है।
वक्फ बोर्ड ने अधिकारियों से की हस्तक्षेप की मांग
मामले से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली वक्फ बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर मस्जिद की स्थिति पर ध्यान देने का आग्रह किया है। बोर्ड ने मस्जिद और उससे जुड़े कब्रिस्तान की कानूनी स्थिति का हवाला देते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।बोर्ड का कहना है कि संबंधित संपत्तियों का उल्लेख वर्ष 1977 की दिल्ली गजट अधिसूचना में वक्फ संपत्ति के रूप में किया गया है। इस दावे की मौजूदा कानूनी स्थिति और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन आवश्यक है।
बिजली-पानी और नमाजियों की पहुंच पर चिंता
मीडिया रिपोर्टों में मस्जिद क्षेत्र में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित होने तथा नमाजियों को प्रवेश में परेशानी आने की बात कही गई है। इस घटनाक्रम को लेकर धार्मिक संगठनों ने संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप करने और नमाजियों की पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है। इस बीच, बेदखली नोटिस को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में नोटिस जारी किए जाने की बात कही गई, जबकि अन्य रिपोर्ट में संबंधित सरकारी विभाग के सूत्रों के हवाले से इसका खंडन किया गया। इसलिए नोटिस की स्थिति को लेकर आधिकारिक दस्तावेज और विभागीय स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण हैं।
जमीयत ने भी उठाया मामला
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधियों ने भी इस मामले को संबंधित केंद्रीय मंत्री के समक्ष उठाया। संगठन ने मस्जिद और कब्रिस्तान की सुरक्षा तथा नमाजियों को प्रवेश की सुविधा देने की मांग की। संगठन की ओर से बातचीत के दौरान मिले आश्वासन का भी उल्लेख किया गया है। फिलहाल मामले में मस्जिद की कानूनी स्थिति, बिजली-पानी की बहाली और परिसर में प्रवेश से संबंधित सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं। किसी संभावित बेदखली या ध्वस्तीकरण कार्रवाई के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक आदेशों और संबंधित विभागों के बयान की पुष्टि करना जरूरी है। मामले में आगे होने वाले प्रशासनिक फैसलों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है।