पंजाब का केलिफोर्निया अबोहर, जहां किन्नू की भरपूर पैदावार

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  • किन्नूू काश्तकारों को इस जनवरी माह के बीच ऊंचे दाम मिलने की बनी उमीद
  • 25 से 30 रुपए प्रति किग्रा के हिसाब से हो रहे सौदे
  • इस बार किन्नू की आवक में रही कमी, ऊँचे रेट मिले तो हो भरपाई : भादू

सच कहूँ न्यूज/सुधीर अरोड़ा
अबोहर। जिला फाजिल्का में ठंड का सितम लगातार जारी है, कुछ दिन पूर्व हुई बूंदाबांदी के बाद यहां सर्द हवाओं के साथ ठंड सुबह शाम काफी ज्यादा पड़ रही है। धुँध भी पूरे इलाके को आगोश में लेकर छाई नजर आती है। जिससे कई बार विजिबिलिटी बिल्कुल जीरो होती है। बढ़ती सर्दी की वजह से दोपहिया चालकों बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले लोगों का कहना है कि सुबह के समय ठंड बहुत ज्यादा है, यहां शिमला जैसा माहौल बना हुआ है। निरन्तर शीतलहर चलने से कंपकंपी छूट रही है। शरीर पर ऊनी कपड़े भी बेअसर साबित हो रहे हैं।

Kinnow

अगर बात करें अबोहर क्षेत्र में वार्षिक फसल किन्नू की तो इसकी अधिक पैदावार के चलते ए कैलीफोर्निया के नाम से जाना जाता है व यहां के किन्नू विदेशों में निर्यात भी होते हैं, जिले में करीब 34 हजार हेक्टेयर रकबे में किन्नू के बाग हैं। गाँव शेरगढ़ के प्रगतिशील युवा किसान विकास भादू का कहना है कि अभी तक किन्नू का पूरा भाव नहीं मिल रहा। वैसे अभी 25 से 35 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से सौदे हुए है व हो भी रहे है। इस बार धुंध अभी कम पड़ी है। इसी धुंध के मार्फत किन्नू में मिठास उत्पन्न होती है।

जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल में फ़्लोरिंग (नए फल बनने के फूल-फुलगुड्डी) के चलते पानी की बागों को अत्याधिक आवश्यकता होती है। उस समय कम पानी मिलने की भी मार पड़ी है। भीषण गर्मी के चलते फुलगुड्डी झड़ने से आवक में कहीं न कहीं कमी महसूस जरुर नजर आती है। वहीं अभी की बात करें तो हवा चलने से अभी कोहरा नही जमा है। कोहरे से किन्नू के बागों के अलावा सरसों की फसल, हरे घास व किन्नू ड्रॉपिंग आदि का नुकसान होता है। जबकि सीजन में धुँध गेंहू आदि फसल के लिए भी फायदेमंद है। कोहरे के बचाव के लिए बागबान तापमान को स्थिर रखने के लिए धुएँ व पानी छोड़ने का प्रबंध करते है।

दुकानदारी बढ़िया चलने की उम्मीद लगाए बैठे दुकानदार

अब किन्नू के व्यापारियों के आने से सौदे होने में तेजी दिखने लगी है। इसी जनवरी माह के बीच सौदे बढ़ने से भाव में तेजी आने के आसार बताए जा रहे है। किन्नू तोड़ने को जाती लेबर और किन्नू लोढ़ कर जाती गाड़ियां दिखने से जहां किसानों और मजदूर वर्ग के चेहरों पर मुस्कान छाने लगी है। वहीं गांवों और शहरों में बैठे दुकानदार भी पुरानी उधारी आने और नया होजरी और किरयाना बिकने की आस लगाने लगे हैं। अगर बाहरी दिल्ली, नेपाल, बैंगलोर, भूटान, श्री लंका इत्यादि शहरों की बात करें तो वहां के मुताबिक यहां रेट बहुत ही कम मिलते है। आगामी कोरोना के सिर उठाए जाने की कहीं न कहीं बागबानों में खौफ जरुर नजर आता है क्योंकि अगर कोरोना आता है तो भाव भी कहीं न कहीं गिरने का डर है।

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