स्मार्ट सिटी व बाढ़ की मार

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20 साल पूर्व देश के कई राज्यों के बड़े नेताओं ने दावा किया था कि उनकी पार्टी की सरकार बनाओ राज्य को कैलिफोर्निया बना देंगे। इसके बाद एक नेता ने जमीनी हकीकत को ब्यां करते हुए कहा,‘मुझे जिताओ, मैं आपके शहर को कैलिफोर्निया तो नहीं, रहने के लायक जरूर बना दूंगा।’’ हालात यह हैं कि देश की राजधानी भी रहने के लायक नहीं रही। बीते दिनों बरसात के कारण इस राष्ट्रीय राजधानी में सड़कें पानी-पानी हो गई और लोग अपने घरों तक पहुंचने के लिए परेशान होते रहे।

देश की सरकार स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत अनुदान जारी कर रही है लेकिन हालात यह हैं कि अभी तक हमारे शहर छोटी-मोटी बारिश की मार भी झेल नहीं पाते। दिल्ली वालों का दर्द किसी ने नहीं जाना। इस संबंध में न तो केंद्र सरकार व न ही दिल्ली सरकार का कोई बयान आया। यही हाल मुंबई का होता आ रहा है। नेता चुपचाप देखते रहे और जनता वास्तविकता से हैरान होती रही।

बारिश तो यूरोपीय देशों में भी हमारे देश की अपेक्षा ज्यादा होती है लेकिन लंदन व वाशिंगटन में कभी पतलूनों को ऊपर उठाकर चलते लोगों व पानी में बंद कारों को धक्का लगाते हुए लोगों को नहीं देखा। भारत के विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा किया जा रहा है लेकिन इन दावों के हिसाब से हमारे जल निकासी प्रबंध आधी सदी पीछे चल रहे हैं। यदि दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों का यह हाल है तो छोटे-बड़े शहरों में सुधार की उम्मीद निकट भविष्य में संभव नहीं। आम लोगों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाना देश के विकास की निशानी है।

केवल ऊंची इमारतों के साथ ही देश ऊंचा नहीं हो सकता बल्कि आम लोगों का रहन-सहन व जीवन स्तर ऊंचा होना जरूरी है। केरल जैसे राज्यों में बाढ़ के प्रकोप का कारण भी खुद समझ आता है लेकिन दिल्ली महानगर जो क्षेत्रफल के हिसाब से केरल का अंश मात्र है यहां पर बरसात के पानी की निकासी सुचारू नहीं, नदियां जोड़ना अभी दूर की कौड़ी है।

सरकार विकास के जो दावे करती हैं उनमें से अगर आधे वायदों पर भी गंभीरता से अमल हो तब जनता को कोई समस्या न आए। देश मजबूत तब ही कहलाएगा यदि देश के लोग भी मजबूत होंगे।

 

 

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