पुष्कर सिंह धामी कल लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

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देहरादून (एजेंसी)। उत्तराखंड के ग्याहरवें मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी रविवार को शपथ लेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने यूनीवार्ता को बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने शनिवार को राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को पत्र सौंप कर, खटीमा से विधायक पुष्कर सिंह धामी को विधान मंडल दल का नेता चुने जाने की जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि धामी कल राज्य के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे।

  • तीस मिनट तक चली इस बैठक में खटीमा से विधायक धामी को विधायक दल का नेता सदन चुन लिया गया।
  • तोमर ने बैठक कक्ष के बाहर एकत्रित संवाददाताओं को इसकी जानकारी दी।
  • धामी को नेता सदन चुने जाते ही फूल-मालाओं से लाद दिया गया।

कौन हैं पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड में अभी तक बने सभी मुख्यमंत्रियों में सबसे युवा हैं। धामी का जन्म साल 16 सितंबर, 1975 को राज्य के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की तहसील डीडीहाट के टुण्डी गांव में हुआ है। उनका ताल्लुक सैन्य परिवार से रहा है और वे तीन बहनों के भाई हैं। उनके पिता पूर्व सैन्य अधिकारी थे। धामी की शुरूआती शिक्षा गांव में हुई और हायर एजुकेशन लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है। पुष्कर धामी मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। धामी को पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का करीबी माना जाता है।

पुष्कर सिंह धामी का राजनीतिक जीवन

1990 से 1999 तक जिले से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों में रहकर विद्यार्थी परिषद में कार्य करने का अनुभव है। पूर्व मुख्यमंत्री के साथ एक अनुभवी सलाहकार के रूप में 2002 तक कार्य करने का भी अनुभव है। दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए 2002 से 2008 तक प्रदेशभर में जगह-जगह भ्रमण कर बेरोजगार युवाओं को संगठित करके विशाल रैलियां भी आयोजित की गई है।

Pushkar Singh Dhami

क्या है मामला:

अपुष्ट सूत्रों के अनुसार, धामी आज देर शाम मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके लिये राजभवन में तैयारी कर ली गई हैं। उल्लेखनीय है कि पौड़ी संसदीय क्षेत्र से सांसद और निवर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने शुक्रवार देर रात्रि मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था। इसका कारण उनको विधायक न होना था। संवैधानिक कारणों से राज्य सरकार का कार्यकाल एक वर्ष से कम होने के कारण विधानसभा का उपचुनाव नहीं कराया जा सकता था। इससे पूर्व, 09 मार्च को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर तीरथ मुख्यमंत्री बनाये गये थे।

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