Rakesh Kumar: हस्तशिल्प मेले में भारतीय हुनर से तराशे प्राकृतिक डिजाइनों की बढ़ रही डिमांड

62वें आईएचजीएफ दिल्ली मेले में विदेशी खरीदारों ने भारतीय कारीगरी को सराहा, एफटीए और निर्यात प्रोत्साहन पर भी मंथन

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ग्रेटर नोएडा (सच कहूँ न्यूज़)। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित 62 वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला–ऑटम 2026 में चौथे दिन खरीदारों के रुझान से यह तस्वीर उभरकर सामने आई है। वैश्विक बाजार में अब ऐसे हस्तशिल्प उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जो घरों को आकर्षक बनाने के साथ सुकून, आराम और प्रकृति से जुड़ाव का एहसास भी दें। प्राकृतिक सामग्री, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं, पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक डिजाइन का मेल विदेशी खरीदारों को खासा आकर्षित कर रहा है।

13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित मेले में भारतीय हस्तशिल्प की विविधता के साथ वैश्विक बाजार की बदलती पसंद भी देखने को मिली। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के मुख्य संरक्षक एवं आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं अब ऐसे उत्पादों की ओर बढ़ रही हैं, जो संतुलन, आराम और भावनात्मक स्वास्थ्य का अनुभव दें। प्राकृतिक सामग्री, आकर्षक बनावट, असली कारीगरी और प्रकृति से प्रेरित भारतीय हुनर से तराशे गए  डिजाइन का महत्व बढ़ रहा है।

होम डेकोर में हस्तनिर्मित वस्तुएं, वॉल आर्ट, भित्ति चित्र और मूर्तिकला आधारित सजावटी उत्पाद घरों को व्यक्तिगत और सुकून भरा रूप दे रहे हैं।ईपीसीएच अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना के अनुसार, मेले में होम डेकोर, गिफ्टिंग, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग, फर्नीचर और इंटीरियर उत्पादों के प्रति खरीदारों ने मजबूत रुचि दिखाई।

फर्नीचर में ऐसे डिजाइन पसंद किए जा रहे हैं, जो सीमित जगह में उपयोगी होने के साथ आरामदायक और आधुनिक भी हों। टिकाऊ सामग्री, पारंपरिक शिल्प और समकालीन डिजाइन के मेल वाले उत्पादों को भी प्राथमिकता मिल रही है। मेले में 3,000 से अधिक प्रदर्शकों और 900 स्थायी शोरूम के जरिए भारतीय हस्तशिल्प की व्यापक श्रृंखला पेश की गई।

विदेशी खरीदारों को भा रही भारतीय हुनर  से तराशी गई कारीगरी

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान और नीदरलैंड से आए खरीदारों ने भारतीय उत्पादों की विविधता और कारीगरी की सराहना की। अमेरिकी खरीदार डीन ऐशले ने भारतीय वस्त्रों, हस्तनिर्मित उत्पादों और पारंपरिक शिल्प में रुचि दिखाई। ऑस्ट्रेलिया के जेक व्हीलर ने मेले को बेहतरीन अनुभव बताया। फ्रांस की एमिली ने टेबलवेयर, फर्नीचर तथा लकड़ी और लोहे से बने उत्पादों को पसंद किया, जबकि जापान की तोमोको इदा ने कपास, जूट और लिनेन जैसे प्राकृतिक रेशों से बने होम डेकोर उत्पादों में दिलचस्पी दिखाई।

नीदरलैंड के खरीदार अरेंड मोस्टर्ड ने भारतीय हस्तशिल्प की विशिष्टता, खासकर धातु शिल्प, की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतीय रग और वस्त्रों को नीदरलैंड के ग्राहक भी पसंद करते हैं। ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने बताया कि मेले में लाइव क्राफ्ट प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहे। इनके माध्यम से खरीदारों को पारंपरिक तकनीकों और कारीगरों के हुनर को करीब से देखने तथा कुछ तकनीकों को स्वयं आजमाने का अवसर मिला।

एफटीए और निर्यात सहायता पर हुई चर्चा:राकेश रावत

मेले के दौरान आयोजित ज्ञान सत्रों में भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए खुलने वाले अवसरों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बाजार तक पहुंच, वैश्विक मूल्य श्रृंखला, टैरिफ, मूल के नियम और सोर्सिंग रणनीतियों की जानकारी दी। ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ पर आयोजित सत्र में निर्यातकों को वित्तीय सहायता, बाजार विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के उपायों से अवगत कराया गया।

मेले की स्वागत समिति के अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ने बताया कि इन सत्रों का उद्देश्य निर्यातकों को बदलते वैश्विक बाजार के अनुरूप तैयार करना है। वहीं, ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि परिषद कारीगरों और बुनकरों को कौशल विकास, उत्पाद नवाचार, ब्रांडिंग, विपणन और ऑर्डर पूरा करने तक सहायता प्रदान कर रही है। मेले में उत्पाद विकास और विजुअल मर्चेंडाइजिंग पर विशेष मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किया गया।

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