शिक्षा और रोजगार
Body Donation: चक्कां की सचखंडवासी शांति देवी इन्सां का पार्थिव शरीर मेडिकल शोध के लिए दान
बेटियों और पुत्रवधुओं ने अर्थी को कंधा देकर दिया बेटा-बेटी एक समान का संदेश
खारियां, (सच कहूँ/सुनील कुमार)। डेरा सच्चा सौदा की मानवता भलाई मुहिम के तहत ब्लॉक चक्कां के गांव चक्कां निवासी 70 वर्षीय माता शांति देवी इन्सां का पार्थिव शरीर मेडिकल शोध एवं चिकित्सा शिक्षा के लिए दान किया गया। परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए बुधवार को शरीरदान की प्रक्रिया पूरी कर समाज के सामने सेवा, समर्पण और मानवता का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, साध-संगत, रिश्तेदार और सामाजिक गणमान्य लोग मौजूद रहे। Sirsa News
जानकारी के अनुसार माता शांति देवी इन्सां पत्नी बनवारी लाल इन्सां (डाल), पिछले करीब एक माह से अस्वस्थ थीं। मंगलवार शाम उन्होंने सांसारिक यात्रा पूर्ण कर सचखंड गमन किया। उनके निधन के बाद परिवार ने डेरा सच्चा सौदा द्वारा संचालित मानवता भलाई कार्यों की अमर सेवा मुहिम के तहत उनका पार्थिव शरीर मेडिकल शोध के लिए दान करने का निर्णय लिया। इस दौरान शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादारों ने विनती भजन के साथ अंतिम यात्रा की शुरूआत की।
फूलों से सजी एंबुलेंस में पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया गया। अंतिम विदाई के समय परिजनों और उपस्थित लोगों की आंखें नम थीं। मार्ग में पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह पार्थिव शरीर अंबाला के सादोपुर स्थित एमएम कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च, महर्षि मारकंडेश्वर यूनिवर्सिटी को भेजा गया, जहां मेडिकल विद्यार्थी चिकित्सा प्रशिक्षण व शोध कार्यों में इसका उपयोग करेंगे। शरीरदान के साथ ही माता शांति देवी इन्सां का नाम ब्लॉक चक्कां की शरीरदान सूची में 15वें तथा गांव चक्कां की सूची में तीसरे स्थान पर दर्ज हो गया।
इस अवसर पर बनवारी लाल इन्सां, महेंद्र सिंह, जगदीश इन्सां, रोशनी इन्सां, सुशीला इन्सां, संतोष इन्सां, सर्वेश, मनीष, प्रवीण, पायल, धापी, अनीता, पूजा, सृष्टि, सुमन, किरण बाला सहित बड़ी संख्या में परिजन, ग्रामीण, साध-संगत तथा विभिन्न समितियों के जिम्मेदार सदस्य उपस्थित रहे। Sirsa News
अंतिम यात्रा दौरान डेरा सच्चा सौदा की बेटा-बेटी एक समान मुहिम का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। माता शांति देवी इन्सां की बेटियों रोशनी इन्सां, सुशीला इन्सां, संतोष इन्सां और समेस्ता इन्सां के साथ पुत्रवधुओं रोशनी देवी और सिया इन्सां ने भी अर्थी को कंधा दिया। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों द्वारा माता-पिता की अंतिम यात्रा में भागीदारी समाज में समानता और जागरूकता का सकारात्मक संदेश दे रही है।

सचखंडवासी के पुत्र जगदीश इन्सां ने बताया कि उनकी माता ने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से गुरुमंत्र प्राप्त किया था और जीवनभर मानवता भलाई कार्यों में सक्रिय रूप से सेवा करती रहीं। उन्होंने न केवल स्वयं सेवा कार्यों में भाग लिया बल्कि पूरे परिवार को भी रूहानियत और समाजसेवा के मार्ग से जोड़ा।
समाज को नई दिशा दे रही मुहिम: सोना देवी
ब्लॉक समिति सदस्य सोना देवी ने कहा कि डेरा सच्चा सौदा की ओर से चलाई जा रही बेटा-बेटी एक समान मुहिम समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही है। बेटियों और पुत्रवधुओं द्वारा माता-पिता तथा सास-ससुर की अर्थी को कंधा देने की परंपरा सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव को समाप्त करने में मददगार साबित हो रही है।
मेडिकल शिक्षा व शोध के लिए उपयोगी: सरपंच
गांव चक्कां के सरपंच अमर सिंह छापोला ने कहा कि शरीरदान की अमर सेवा मुहिम चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना और विभिन्न बीमारियों की गहन जानकारी प्राप्त करने में ऐसे दान बेहद उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि इससे चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायता मिलती है और भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। Sirsa News
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