Haryana:हरियाणा के ये गांव और जिले को सैनी सरकार ने दिया दिवाली तोहफा, प्रोपर्टी के दामों में आया जबरदस्त उछाल
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Haryana: चरखी दादरी। हरियाणा के चरखी दादरी शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और लोगों को जाम से राहत दिलाने के लिए सरकार ने मिनी बाईपास को मंजूरी दी है। करीब 19 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह बाईपास शहर के कई प्रमुख इलाकों को आपस में जोड़ेगा। इससे हुडा सेक्टर-8 और 9, पुराना शहर, गामड़ी क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
इस मिनी बाईपास का निर्माण सिंचाई विभाग की बंद पड़ी माइनर की जमीन पर किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने के बाद लोगों को शहर के व्यस्त चौक और मुख्य सड़कों से होकर लंबा रास्ता तय करने की जरूरत कम पड़ेगी। साथ ही, शहर के अंदर यातायात का दबाव घटाने में भी मदद मिल सकती है।
हुडा सेक्टर-8 व 9 से फायर स्टेशन तक बनेगा बाईपास
प्रस्तावित मिनी बाईपास हुडा सेक्टर-8 और 9 से शुरू होकर मेजबान चौक होते हुए फायर स्टेशन तक पहुंचेगा। इसके बाद यह मार्ग रावलधी-भिवानी लिंक रोड बाईपास से जुड़ने में मदद करेगा। इस तरह शहर के कई प्रमुख हिस्सों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा।
इस सड़क के निर्माण से बाजार के आसपास यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। खासकर उन वाहन चालकों को फायदा होगा, जिन्हें शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए मौजूदा व्यस्त मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
19.68 करोड़ रुपये होंगे खर्च, डेढ़ किलोमीटर लंबी होगी सड़क
मिनी बाईपास परियोजना पर करीब 19 करोड़ 68 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसकी कुल लंबाई लगभग डेढ़ किलोमीटर प्रस्तावित है। सड़क की चौड़ाई को लेकर अधिकारियों के बयान में 10 मीटर और 33 फीट का उल्लेख किया गया है। दोनों माप लगभग समान हैं।
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और वन विभाग की टीम इसी सप्ताह मौके का निरीक्षण करेगी। इस दौरान निर्माण क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की संख्या का आकलन किया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार आवश्यक मंजूरियां लेकर निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
1976 में बना था माइनर का निर्माण कार्य
इस परियोजना के लिए जिस जमीन का इस्तेमाल किया जाना है, वहां कलियाणा रोड से शुरू होने वाली माइनर का निर्माण वर्ष 1975 में शुरू हुआ था और 1976 में पूरा किया गया था। यह माइनर करीब तीन किलोमीटर लंबी थी।
सिंचाई के लिए पर्याप्त रकबा नहीं रहने के कारण वर्ष 2009 में इसे क्षतिग्रस्त घोषित कर बंद कर दिया गया था। इसके लिए लगभग 60 से 70 फीट चौड़ी जमीन आरक्षित थी। वर्ष 2022 में इस जमीन को लोक निर्माण विभाग के अधीन करने की योजना पर काम शुरू हुआ। इसके बाद सितंबर 2025 में जमीन पीडब्ल्यूडी विभाग को स्थानांतरित किए जाने की जानकारी दी गई थी।
अब इसी जमीन का इस्तेमाल मिनी बाईपास बनाने के लिए किया जाना है, जिससे लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी जगह का सड़क संपर्क बेहतर करने में उपयोग हो सकेगा।
इन गांवों के लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
चरखी दादरी के विधायक सुनील सांगवान के अनुसार, मिनी बाईपास बनने से शहर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी लाभ मिलेगा। हुडा सेक्टर-8 और 9, पुराना शहर तथा गामड़ी क्षेत्र के निवासियों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा घिकाड़ा, चरखी और रावलधी गांवों की ओर जाने वाले लोगों को भी फायदा होने की उम्मीद है। उन्हें महेंद्रगढ़ चौक और लोहारू चौक से होकर लंबा रास्ता तय करने के बजाय नए मार्ग से अपेक्षाकृत कम दूरी तय करने का विकल्प मिल सकेगा।
विधायक के मुताबिक, यह सड़क शहर के विभिन्न हिस्सों को आपस में जोड़ने के साथ यातायात का दबाव कम करने में भी सहायक होगी। उन्होंने परियोजना को जल्द पूरा करवाने का प्रयास करने की बात कही।
जल्द शुरू होगी आगे की प्रक्रिया: पीडब्ल्यूडी
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन गुरचरण सिंह ने बताया कि सड़क को मंजूरी मिल चुकी है और इसे जल्द तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग की ओर से जमीन के लिए एनओसी जारी की जा चुकी है। जमीन हस्तांतरण सहित जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद परियोजना पर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
कुल मिलाकर, चरखी दादरी का यह मिनी बाईपास शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना साबित हो सकता है। इसके निर्माण से शहर और आसपास के गांवों के बीच संपर्क सुगम होने के साथ लोगों का समय बचने और व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।