World Mental Health Week: मानसिक स्वास्थ्य पर चुप्पी तोड़ें, तनाव में अपनों का बनें सहारा
विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह : तनाव प्रबंधन व आत्महत्या रोकथाम का दिया संदेश
Mental Health Awareness Campaign: हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज़)। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान एवं क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह मनाया गया। इस दौरान सेना शिविर, विद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन और आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूक किया गया।
अभियान का उद्देश्य मानसिक समस्याओं से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करना और लोगों को अपनी समस्याओं पर खुलकर बातचीत करने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रमों का आयोजन मनोविज्ञान एवं क्लिनिकल साइकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। अभियान में वर्षा अरोड़ा सिंह एवं पौलोमी घोष ने सक्रिय भूमिका निभाई। विभाग के एमफिल (क्लिनिकल साइकोलॉजी), एमए (मनोविज्ञान) और बीए (मनोविज्ञान) के विद्यार्थियों ने विभिन्न जागरूकता सत्रों में हिस्सा लेकर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी साझा की।
श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के समग्र विकास और स्वस्थ समाज के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को छिपाने या कमजोरी समझने के बजाय उनके बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। विद्यार्थियों और युवाओं को भावनात्मक सहयोग, सकारात्मक वातावरण और उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। समय पर सहायता उपलब्ध करवाकर मानसिक समस्याओं को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
विश्वविद्यालय के एमडी दिनेश कुमार जुनेजा ने कहा कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में विद्यार्थी शैक्षणिक दबाव, तनाव और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसे में उन्हें सकारात्मक वातावरण, उचित मार्गदर्शन और आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध करवाना महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं को अपनी समस्याएं समझने, आत्मविश्वास बढ़ाने तथा जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने के लिए प्रेरित करते हैं।
सेना के जवानों से विद्यार्थियों तक पहुंचा जागरूकता संदेश
अभियान की शुरुआत 3 अक्टूबर को सूरतगढ़ स्थित सेना शिविर में जागरूकता सत्र के साथ हुई। इसमें सेना के अधिकारियों एवं जवानों को मानसिक स्वास्थ्य, कार्यस्थल पर तनाव, भावनात्मक संतुलन और तनाव प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी गई। 7 अक्टूबर को पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय, पल्लू में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें किशोरावस्था की चुनौतियों, परीक्षा संबंधी तनाव, भावनात्मक बदलाव, आत्मविश्वास, साथियों के दबाव और आत्महत्या रोकथाम जैसे विषयों पर चर्चा हुई। 8 अक्टूबर को गुड डे सैनिक स्कूल में आयोजित सत्र के दौरान विद्यार्थियों को किशोरावस्था की समस्याओं, तनाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन के बारे में जानकारी दी गई।
9 और 10 अक्टूबर को विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। इनमें शैक्षणिक दबाव, युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, आत्महत्या रोकथाम और समकालीन मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गई। 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सामूहिक शपथ ग्रहण के साथ अभियान का समापन हुआ। प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने, मानसिक समस्याओं से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने, जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगपूर्ण व्यवहार अपनाने और समय पर उचित सहायता लेने का संकल्प लिया। अभियान का मूल संदेश रहा कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर चुप्पी के बजाय संवाद, कलंक के बजाय संवेदनशीलता और उपेक्षा के बजाय समय पर सहायता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।