Punjab
धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के खानपुर कोलियां के शरीरदानी रघुबीर सिंह इन्सां को सेवादारों ने मानव श्रृंखला बनाकर दी अंतिम विदाई
मरणोपरांत शरीरदानी कर अमर हो गए रघुबीर इन्सां
कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र की पावन धरा, जो धर्म और कर्म के संदेश के लिए जानी जाती है, अब फिर एक बार फिर एक अनोखे दान की गवाह बनी है। गांव खानपुर कोलियां के 57 वर्षीय रघुबीर सिंह ने जीते जी तो समाज की सेवा की ही, लेकिन जाते-जाते अपने शरीर को भी चिकित्सा शोध के लिए दान कर एक अमिट पदचिह्न छोड़ गए हैं। कुछ दिन पहले बीमारी हुए रघुबीर इन्सां का बुधवार देर रात्रि देहांत हो गया था। उन्होने जीते जी डेरा सच्चा सौदा में शरीरदान के लिए फार्म भरा हुआ था। परिजनों ने उनके संकल्प को पूरा करते हुए उनके पार्थिक शरीर का दान किया है। Kurukshetra News
जब रघुबीर इन्सां के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई के लिए तैयारी थी, तो माहौल गमगीन जरूर था, लेकिन उसमें एक गर्व की अनुभूति भी थी। गांव खानपुर कोलियां का पूरा आसमान रघुबीर इन्सां अमर रहे के नारों से गूंज रहा था। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर कमेटी के सेवादारों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर रघुबीर इन्सां को अंतिम विदाई दी। उनके पार्थिव शरीर को फूलों से सजी एम्बुलेंस में मानसा पंजाब के खालसा आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। हर किसी की आंखे नम तो थीं, साथ ही गौरव के क्षण भी थे। इस मौके पर गांव के सरपंच रामकुमार, प्रेमी सेवक पिपली बलवान इन्सां, प्रेमी सेवक उमरी मा. गुरदीप, लाखन इन्सां, बाबा रामदास, रवि इन्सां, बलकार, कीमती लाल, बृजमोहन इन्सां, राकेश अग्रवाल, ओमप्रकाश, मांगेराम, बलराज, संतलाल, बलविन्द्र, राजकुमार बजाज सहित हजारों लोग मौजूद रहे।
शरीरदानी रघुबीर इन्सां के पुत्र ऋतिक इन्सां ने कहा कि उसके पिता कुछ दिनों से बीमार थ। अंतिम समय से पहले वे कई बार कहते थे कि उसके शरीर का दान करना है, ताकि वे भी मानवता के काम आ सकें। इसलिए पूरे परिवार ने डेरा सच्चा सौदा की शिक्षाओं पर अमल करते हुए मरणोपरांत उनके शरीर का दान किया है। वे अपने पीछे पत्नी किरण, बेटियां नेहा इन्सां व गंगा इन्सां, एक बेटा ऋतिक इन्सां को छोड़ गए हैं। गांव के पंच रामेश्वर व नंबरदार सुरेश कुमार ने कहा कि डेरा सच्चा सौदा के सेवादार रघुबीर सिंह इन्सां के जीवन का मूल मंत्र ही सेवा था। वे गांव में मिठाई की दुकान चलाते थे व अक्सर कहते थे कि यह शरीर पांच तत्वों से बना है और अंत में मिट्टी में मिल जाना है, तो क्यों न इसे किसी ऐसे काम में लगाया जाए जिससे आने वाली पीढ़ियों का भला हो सके। Kurukshetra News
मुहिम समाज में फैली भ्रांतियों को तोड़ने का करेगी काम कॉपरेटिव बैंक के मैनेजर व गांव खानपुर कोलियां निवासी नरेश कुमार ने कहा कि रघुबीर इन्सां की यह पहल समाज में फैली उन भ्रांतियों को तोड़ती है जो देह दान को धर्म के विरुद्ध मानती हैं। डेरा सच्चा सौदा की प्रेरणा पर अमल करते हुए उन्होंने सिद्ध कर दिया कि सबसे बड़ा धर्म मानव सेवा है। रघुबीर इन्सां की सोच व उनके परिवार ने निर्णय ने समाज में एक छाप छोड़ी है, जिससे समाज में शरीरदान व अंगदान के प्रति जागृति आएगी।
डेरा सच्चा सौदा द्वारा किए जा रहे मानवता के काम व दी जा रही प्रेरणा महान है, वे नमन करते हैं, ऐसी सोच को। ऐसी सेवा को नमन, जो परहित में हो डेरा सच्चा सौदा के सच्चे नम्र सेवादार राजकुमार मेहता व संजीव शर्मा ने कहा कि मेडिकल के छात्रों के लिए मानव शरीर सबसे बड़ा सहयोगी माना जाता है। रघुबीर इन्सां की इच्छा से परिजनों ने उनके का दान किया है, जोकि अब मेडिकल शोध का हिस्सा बनेगा। मेडिकल कॉलेज में युवा डॉक्टर उनके शरीर पर जटिल सर्जरी का अभ्यास करेंगे। शोधकर्ता मानव शरीर की आंतरिक संरचना और बीमारियों के प्रभावों को बेहतर समझ पाएंगे। मेडिकल विद्यार्थियों को शोध से मिली जानकारी भविष्य में हजारों मरीजों की जान बचाने के काम आएगी। Kurukshetra News