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श्री हरिमंदर साहिब नतमस्तक होना कभी नहीं भूलता था सुखजिन्द्र सिंह सन्नी, पुलिस ने मढ़ दिए बेअदबी के आरोप
(सच कहूँ न्यूज) कोटकपूरा/सिक्खांवाला। सुखजिन्द्र सिंह सन्नी तो बचपन से ही सिख धर्म में श्रद्धा रखता है व ऐसा कोई साल नहीं बीता होगा जब वह किसी एतिहासिक गुरूद्वारा साहिब में नतमस्तक न हुआ हो। यह कहना है कोटकपूरा निवासी सुखजिन्द्र सिंह सन्नी के पारिवारिक सदस्यों का।
परिवार ने बेअदबी मामले में पुलिस द्वारा सन्नी को नामजद करने पर सख्त आपत्ति जताते इसे राजनीतिक चाल व धक्केशाही करार दिया। सन्नी के परिवार ने बताया कि वह शहर के किसी न किसी व्यक्ति का संग कर श्री हरिमंदर साहिब हर साल जाता था। परिवार ने इस संबंधी तस्वीर दिखाते हुए बताया कि उसके दिल में धार्मिक स्थानों के दर्शन व सेवा प्रति पूरी श्रद्धा भावना है।
सन् 2015 में सन्नी का विवाह हुआ तो नवविवाहित दम्पति तख्त श्री दमदमा साहिब में नतमस्तक होकर सन्नी ने इस धार्मिक यात्रा को यादगारी बनाने के लिए तस्वीरें भी करवाई। उन्होंने बताया कि सन्नी के विवाह की रस्म भी कोटकपूरा के एक श्री गुरूद्वारा साहिब में आनंद कारजों के साथ पूरी हुई थी। सन्नी के अलावा उसके भाई के भी आनंद कारज श्री गुरूद्वारा साहिब में ही हुए। सन्नी के दादा सोहन सिंह का देहांत होने के बाद श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी की पावन हजूरी में अरदास करवाई गई। परिवार ने बताया कि सन्नी के खिलाफ बेअदबी के आरोप किसी साजिश के तहत लगाए गए हैं व यह केस बेबुनियाद व झूठे हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर आरोप साहित होते हैं तो वह अपना सिर भी देने के लिए तैयार हैं। उधर बेअदबी के मामले में गिरफ्तार बलजीत सिंह निवासी गांव सिखां वाला, जिला फरीदकोट के पिता जग्गा सिंह ने भरे मन से कहा कि उनके बेगुनाह बेटे को फंसाया गया है।

उन्होंने बताया कि उनका सारा परिवार श्री गुरूद्वारा साहिब का सेवक व समाज के भले के लिए हमेशा आगे रहता है। जग्गा सिंह ने बताया कि वह मिस्त्री का काम जानता है व उसने कहा कि बिना किसी स्वार्थ के गांव के गुरूद्वारा साहिब में अपनी क्षमता अनुसार सेवा की है व कभी कोई मेहनताना नहीं लिया। उन्होंने कहा कि बलजीत सिंह व उसके भाई मनजीत सिंह दोनों का विवाह भी श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी की पावन हजूरी में हुआ। जग्गा सिंह ने कहा कि उसके पिता (बलजीत सिंह का दादा) के मरणोंपरांत उनकी अंतिम अरदास के लिए श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी के पाठ का भोग पाया गया।
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