एक्सपायर दवा देने के मामले में सात लाख के मुआवजे की मांग

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(भीलवाड़ा) राजस्थान के भीलवाड़ा में महात्मा गांधी अस्पताल के दवा वितरण केंद्र से एक्सपायर दवा के सेवन से एक बालक की तबीयत बिगड़ जाने का मामला सामने आया हैं और बालक के पिता ने पीएमओ, सीएमएचओ, बीपीएल दवा वितरण केंद्र अधिकारी और राज्य सरकार के खिलाफ परिवाद दायर कर सात लाख रुपए के मुआवजे की मांग की है।

परिवाद के अनुसार संतोष कॉलोनी निवासी रईस मंसूरी ने स्थाई लोक अदालत में परिवाद दिया कि उसका इकलौता पुत्र अरशान मंसूरी (करीब पांच साल) थैलीसीमिया से पीड़ित है और हर माह दो से तीन बार उसका डायलिसिस कराना पड़ता है। गत आठ जुलाई को भी अरशान को डायलिसिस के लिए महात्मा गांधी अस्पताल मैं भर्ती कर नौ जुलाई को छुट्टी देते समय चिकित्सक ने जो दवाएं लिखी वे बीपीएल दवा वितरण केंद्र से निशुल्क प्राप्त की गई। दवाएं देने के बाद अरशान तबीयत ज्यादा बिगड़ गई।

इस पर दवाओं को चेक किया तो एक दवा केल्फर-250 एक्सपायर डेट की पाई गई। इस दवा की मैन्युफैक्चरिंग जून 2019 जबकि एक्सपायर डेट मई 2022 थी। दवा के सेवन से बालक की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई ऐसे में बालक को निजी अस्पताल में भर्ती करवा उपचार कराया गया।

परिवादी ने महात्मा गांधी अस्पताल के पीएमओ, सीएमएचओ, बीपीएल दवा वितरण केंद्र अधिकारी सहित राज्य सरकार के खिलाफ परिवाद देते हुए एक्सपायर दवा देकर बालक की जान खतरे में डालने की क्षतिपूर्ति के रूप में पांच लाख और मानसिक संताप के रूप में दो लाख रुपए दिलाने की मांग की है।

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